निलंबित आईएएस पूजा सिंघल और सीए सुमन कुमार के खिलाफ ईडी ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। चार्जशीट 5000 से अधिक पन्नों की है और इसमें कहा गया है कि मामले में अभी जांच जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही पूजा सिंघल और सुमन कुमार की मुश्किलें बढ़ गई है।
ईडी ने सुमन कुमार की गिरफ्तारी के 60वें दिन चार्जशीट दाखिल की है। सात मई को सीए सुमन कुमार और 11 मई को निलंबित आईएएस पूजा सिंघल की गिरफ्तारी हुई थी। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद पूजा सिंघल से 14 दिन और सुमन कुमार सिंह से 13 दिन ईडी पूछताछ कर चुकी है।
रिश्वत की रकम से पूजा ने खड़ा किया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप पत्र में गवाहों के हवाले से आरोप लगाया है कि पूजा ने मनरेगा फंड में धांधली को नजरअंदाज करने के एवज में ली गई रिश्वत से ही पल्स सुपर स्पेशियेलिटी अस्पताल खड़ा किया। ईडी ने 5000 पन्ने के आरोपपत्र में पूजा के सीए सुमन कुमार के बयान भी दर्ज किए हैं।
सुमन ने खुद कुबूल किया है कि उसके घर से जब्त की गई 17.79 करोड़ रुपये की नकदी में से अधिकतर पूजा सिंघल की है। यह सारा पैसा उसने पूजा के इशारे पर ही जुटाया था। पूजा के कहने पर ही सुमन कुमार ने पल्स अस्पताल की जमीन खरीदने के लिए बिल्डर को तीन करोड़ रुपये नकद दिए थे। ईडी ने आरोपपत्र में साफ लिखा कि पल्स अस्पताल के निर्माण में पूजा की अहम भूमिका थी और उसने रिश्वत के पैसों से इसे बनवाया।
क्या है मामला?
पूजा सिंघल और अन्य के खिलाफ यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें झारखंड सरकार के पूर्व जूनियर इंजीनियर राम विनोद सिन्हा को ईडी ने 17 जून 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। उससे पहले उसके खिलाफ राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी का अध्ययन करने के बाद 2012 में एजेंसी द्वारा पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया था। सिन्हा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक धाराओं के तहत धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सिन्हा पर एक अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक जूनियर इंजीनियर के रूप में काम करते हुए कथित तौर पर जनता के पैसे की धोखाधड़ी करके उसे अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश करने का आरोप है। एजेंसी ने पहले कहा था कि उक्त धन को खूंटी जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत सरकारी परियोजनाओं के निष्पादन के लिए रखा गया था। सिन्हा ने ईडी को बताया कि उसने जिला प्रशासन को पांच प्रतिशत कमीशन (धोखाधड़ी में से) का भुगतान किया है।