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झारखंड विधानसभा: पारित होगी 1932 भूमि अभिलेख आधारित अधिवास नीति, सीएम बोले- 11 नवंबर का दिन होगा ऐतिहासिक

Sat, 05 Nov 2022 09:37 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

 'आपकी सरकार, आपके द्वार' कार्यक्रम के दूसरे चरण के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ये पहल की है। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  4,616 लाख रुपये की 146 योजनाओं का शिलान्यास किया और 25,598 लाख रुपये की 106 योजनाओं का उद्घाटन किया।
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सीएम हेमंत सोरेन - फोटो : ANI
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विस्तार
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झारखंड में गहराते राजनीतिक संकट के बीच सोरेन सरकार ने 11 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इस विशेष सत्र में राज्य में अधिवास की स्थिति को तय करने के लिए आधार वर्ष के रूप में 1932 को तय करने वाले विधेयक को पारित किया जाएगा। इसे लेकर शनिवार यानी आज सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि 11 नवंबर का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक होगा। इसी दिन सरकार राज्य विधानसभा में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए  1932 भूमि रिकॉर्ड से संबंधित विधेयक पारित करेगी।   

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उन्होंने यह बातें राज्य की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर रामगढ़ जिले के सीसीएल स्टेडियम, रजरप्पा में 'आपकी सरकार, आपके द्वार' (आपकी सरकार आपके दरवाजे पर) कार्यक्रम में बोलते हुए कहीं। इस दौरान उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। सीएम सोरेन ने कहा कि जब उन्होंने गरीब और पिछड़े राज्य के विकास के लिए केंद्र से 1.30 लाख करोड़ रुपये की मांग की, तो केंद्र सरकार ने उनकी मांग के जवाब में ईडी और सीबीआई को भेज दिया। सीएम हेमंत ने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने की साजिश की,  हालांकि, वे साजिश में सफल नहीं होंगे।  

 'आपकी सरकार, आपके द्वार' कार्यक्रम के दूसरे चरण के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ये पहल की है। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  4,616 लाख रुपये की 146 योजनाओं का शिलान्यास किया और 25,598 लाख रुपये की 106 योजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान कुल 2,81,318 लाभार्थियों को 11,982 लाख रुपये की संपत्ति का वितरण भी किया। साथ ही 6,456 लड़कियों को सावित्रीबाई फुले योजनाओं का लाभ दिया। 
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स्थायी निवासी के लिए 1932 के भूमि रिकॉर्ड को माना जाएगा आधार
हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इससे पहले 14 सितंबर को प्रदेश में स्थानीय निवासियों के निर्धारण के लिए 1932 के खतियान (भूमि रिकॉर्ड) को आधार बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव के मुताबिक, जिनके नाम 1932 के खतियान में दर्ज हैं, उनके वंशावली के आधार पर केवल उन्हीं के परिवारों को स्थानीय निवासियों के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
 
गौरतलब है कि स्थानीयता नीति पर राज्य के आदिवासी संगठनों ने लगातार 1932 खतियान को आधार बनाने की मांग की थी क्योंकि उनके अनुसार राज्य के भूमि रिकॉर्ड का अंग्रेज सरकार ने अंतिम बार 1932 में सर्वेक्षण किया था। उनकी मांग के आधार पर यह निर्णय लिया गया था। झामुमो विधायक सुदिव्या कुमार ने कहा कि विधानसभा विधेयक पारित करेगी और इसी के साथ जनता के सामने यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसने उनका समर्थन किया और किसने उनका विरोध किया।

इससे पहले सोरेन सरकार ने राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के मंडरा रहे खतरे के बीच पांच सितंबर को एक विशेष सत्र बुलाया था जिसमें झामुमो सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया था। विपक्षी भाजपा नीत राजग के बहिर्गमन के बीच 81 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 48 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। बता दें कि 81 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी झामुमो के 30 विधायक, कांग्रेस के 18 विधायक और राजद का एक विधायक है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदन में 26 विधायक हैं।

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