झारखंड के एक सरकारी अस्पताल में लापरवाही का एक हैरतंगेज मामला प्रकाश में आया है। वहां भर्ती एक गर्भवती महिला का प्रसव शौचालय में ही हो गया।
प्रसव के बाद बच्चा कमोड में गिर गया और महिला बेहोश हो गई। बाद में गंभीर स्थिति में महिला को शौचालय से बाहर निकाला गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वहीं, घटना के पांच घंटे बाद कमोड तोड़कर बच्चे का शव बाहर निकाला गया।
घटना चाईबासा के सदर अस्पताल की है। जानकारी के अनुसार टोंटो प्रखंड के बड़ाकुचिया निवासी गर्भवती किरण दास को ब्रेन मलेरिया और हीमोग्लोबिन बहुत कम होने के शिकायत के बाद टोंटो पीएचसी से सदर अस्पताल रेफर किया गया था।
सोमवार की दोपहर उसका इलाज शुरू हुआ। उसे खून चढ़ाया गया। रात में किरण को महिला वार्ड के बाथरूम तक उसका पति विनोद दास लेकर गया। उस वक्त वार्ड में नर्स भी डयूटी पर थीं।
शौचालय में ही महिला को प्रसव हो गया। प्रसव के बाद बच्चा कमोड में गिर गया और महिला बेहोश हो गई। गंभीर स्थिति में महिला को शौचालय से बाहर निकाला गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पांच घंटे बाद कमोड तोड़कर बच्चे का शव भी बाहर निकाला गया।
इस घटना पर अस्पताल प्रबंधन रक्षात्मक भूमिका में आ गया है। प्रबंधन का कहना है कि महिला ब्रेन मलेरिया से पीड़ित थी और उसका बच्चा पेट में ही मर चुका था। अस्पताल प्रबंधन ने मामले में परिवार की ओर से कोई शिकायत नहीं मिलने की बात कहकर चुप्पी साध ली है।