छत्तीसगढ़ के रायपुर में दो महीने के बच्चे की एंबुलेंस में दम घुटने से मौत हो गई। उसे इलाज के लिए शहर के भीमराव अंबेडकर अस्पताल लाया गया था। मामला मंगलवार का है। एंबुलेंस का दरवाजा जाम होने से बच्चा दो घंटे तक उसमें बंद रहा। जब काफी कोशिशों के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो बच्चे के पिता ने एंबुलेंस का कांच तोड़ना चाहा। लेकिन उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि वह सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। अधिकारियों की लापरवाही की सजा मासूम को भुगतनी पड़ी। जब काफी मशक्क्त के बाद उसे एंबुलेंस से निकालकर अस्पताल ले जाया गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
एंबुलेंस चलाने वाली कंपनी का कहना है कि उनकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई है। बारिश की वजह से दरवाजा जाम हो गया था। लेकिन 15 मिनट की कोशिश के बाद वह खुल गया था। एंबुलेंस कंपनी का कहना है कि उनका कोई दोष नहीं है। बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और उसकी मौत पहले ही हो गई थी।
जानकारी के मुताबिक बिहार की निवासी अंबिका सिंह के दो महीने के बेटे के दिल में छेद था। इलाज के लिए वह सबसे पहले दिल्ली के एम्स पहुंचे लेकिन वहां खर्चा काफी ज्यादा आ रहा था। जिसके बाद एम्स के ही एक डॉक्टर ने उन्हें रायपुर के अंबेडकर अस्पताल ले जाने की सलाह दी। मासूम की जिंदगी बचाने के लिए परिवार दिल्ली से रायपुर पहुंचा। अस्पताल तक पहुंचने के लिए उन्होंने स्टेशन से संजीवनी एंबुलेंस की सेवा ली। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद जब वह एंबुलेंस से उतरने लगे तो उसका दरवाजा नहीं खुल रहा था।
मामले पर विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को खत लिखकर जांच कराने के लिए कहा है। सिंहदेव ने खत में यह भी कहा है कि बच्चे की मौत के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा है कि गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा।