खुद को गरीबों का रक्षक और मददगार कहने वाले माओवादियों का असली चेहरा कुछ और ही है। 13 साल की नीला जो किसी तरह से माओवादियों के चंगुल से बच निकली, उसने अपनी कहानी सुनाई। उसने बताया कि माओवादियों से बचने के लिए वह सारी रात पेड़ पर लटकी रही। नीला ने बताया कि मुझे उस जगह से नफरत हो रही थी, लेकिन मेरे मन में बस एक ही बात चल रही थी कि मुझे यहां से किसी भी तरह से बाहर निकलना है।
नीला आदिवासी समुदाय से आती है, जिसे माओवादियों ने गुमला जिले के एक गांव से उठा लिया था। वह उसके बड़े भाई को अपने साथ लाना चाहते थें, लेकिन परिवार में कोई भी घर चलाने वाला नहीं था, नीला ने जब उनसे अपने भाई को छोड़ने की मांग की तो वह नीला को ही अपने साथ ले आएं।
पढ़ें: नाबालिग ने किया आदिवासी महिला से बलात्कार
नीला ने बताया कि वह सारी रात लगभग सांस रोककर पेड़ पर रही। उसे बस उस नरक से बाहर निकलना था। नीला ने बताया कि माओवादियों ने उस पिछले तीन महीनों से दासी बनाकर रखा था और उससे नौकरों की तरह काम कराते थे।