- सुगम यात्रा के साथ सुरक्षाबलों के लिए भी अति महत्वपूर्ण है टनल
फिरदौस अहमद
सोनमर्ग (गांदरबल)। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को साल भर खुला रखने के लिए केंद्र सरकार लद्दाख और कारगिल क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए जोजिला टनल का निर्माण कर रही है। इसका काम जोरों पर चल रहा है। विशेष रूप से सोनमर्ग-जोजिला-मीनामर्ग के बीच बर्फ, फिसलन वाली और चुनौतीपूर्ण खतरों से भरी सड़क की स्थिति के कारण श्रीनगर-लेह राजमार्ग हर साल दिसंबर के महीने में सर्दियों के महीनों के लिए बंद रहता है। इसके कारण यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर से लगभग पांच महीने से अधिक समय तक तक कटा रहता है। श्रीनगर-लेह राजमार्ग लद्दाख क्षेत्र को जम्मू और कश्मीर के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क है। इस टनल के बनने से न केवल लद्दाख के स्थानीय लोगों को लाभ पहुंचेगा, बल्कि सुरक्षाबलों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो सीमाओं पर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 13.2 किलोमीटर यह जोजिला टनल गांदरबल जिले के सोनमर्ग और कारगिल जिले के द्रास शहर को जोड़ने के लिए हिमालय पर जोजिला दर्रे के नीचे से गुजरेगी। इस परियोजना को जनवरी 2018 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था। इसके निर्माण के प्रोजेक्ट की शुरुआत मई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि टनल परियोजना एनएच-1 के श्रीनगर-कारगिल-लेह खंड पर यात्रा को हिमस्खलन से मुक्त बनाएगी। सुरक्षा बढ़ाएगी और यात्रा के समय को 3 घंटे से कम करके 15 मिनट कर देगी। टनल पर एक साथ मीनामर्ग और बालटाल दोनों तरफ से काम शुरू हुआ और अब तक इस टनल की खोदाई का काम करीब 5.5 किलोमीटर पूरा हो चुका है।
जोजिला टनल भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सुरंग होगी, जो दो केंद्र शासित प्रदेशों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए एक मेगा सड़क संचार परियोजना का हिस्सा है। सुरंग लद्दाख और कश्मीर के बीच सभी मौसम में संपर्क प्रदान करेगी, जो अन्यथा सर्दियों के दौरान बाधित होती है क्योंकि जोजिला दर्रा बर्फ और हिमस्खलन से ढका रहता है। कुछ वर्ष पहले सरकार ने सोनमर्ग और एसएसजी (श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी) रोड - दोनों को साल भर खोलने के फैसला पर विचार किया और सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में दो स्थानों पर सुरंगों के निर्माण को मंजूरी दी। पहली सुरंग को जेड-मोड़ सुरंग कहा जाता है जो है गगनगीर से शितकड़ी सोनमर्ग तक बनाई जा रही है, जिसकी लंबाई 6.4 किमी है और इस टनल का निर्माण एप्को इंफ्राटेक कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है, हालांकि इसकी खुदाई का काम पूरा हो चुका है और इस टनल का टारगेट दिसंबर 2023 रखा गया है। मिली जानकारी के अनुसार जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण एप्को द्वारा वर्ष 2015 में काम शुरू किया था।
13.2 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग को जोड़ेंगे चार पुल
केंद्र सरकार द्वारा 13.2 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग के निर्माण का जिम्मा मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) को दिया गया। एमईआईएल के प्रोजेक्ट मैनेजर हरपाल सिंह ने कहा कि चार सुरंग अलग-अलग जगहों पर बनाई जा रही हैं और उनमें खोदाई का काम पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा सुरंग को जोड़ने वाले चार पुल भी हैं, जिनका अभी तक करीब 70 फीसदी काम हो चुका है। एक अन्य अधिकारी वीके पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि जोजिला मेन टनल जो हमने बालटाल से मीनामर्ग निकलेगी, जिसकी लंबाई 13.2 किलोमीटर है, उसका अब तक 5.5 किलोमीटर का खुदाई का काम पूरा हो चुका है। करीब 40 प्रतिशत खुदाई का काम पूरा हो चुका है।
प्रोजेक्ट पर 2500 मजदूर कर रहे काम
जानकारी के अनुसार पूरे प्रोजेक्ट में करीब 2500 मजदूर काम कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर यूटी के 74 प्रतिशत स्थानीय लोगों को इस सुरंग के काम के लिए रखा गया है, जबकि 26 प्रतिशत ही बाहरी मजदूर इस परियोजना में काम कर रहे हैं। हरपाल सिंह के अनुसार अमरनाथ यात्रा की सुविधा के लिए कंपनी ने लगभग 2.50 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और कंपनी को पवित्र गुफा में बाढ़ के मलबे को हटाने के लिए एक मिशनरी भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि मुख्य जोजिला टनल का कार्य 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।