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जम्मू-कश्मीर: आतंकी इतिहास को पीछे छोड़ प्रदेश जी-20 बैठक की मेजबानी को तैयार, चंद दहशतगर्द ही घाटी में मौजूद

Sun, 16 Apr 2023 11:18 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

जी-20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक के लिए श्रीनगर को चुना गया। अब जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों की संख्या घटकर 50 रह गई है। पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकवाद को काबू करने में काफी हद तक सफलता पाई है।
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श्रीनगर में बनाई गई पेंटिंग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे शासन की आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति ने जम्मू और कश्मीर के लोगों को स्वतंत्र रूप से सांस लेने की अनुमति दी है। वे श्रीनगर में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने और दुनिया को यह संदेश देने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्र में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अपने आखिरी चरण पर है।

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भारत ने 22 से 24 मई तक होने वाली जी-20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक के लिए श्रीनगर को स्थल के रूप में घोषित किया। अब जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों की संख्या घटकर 50 रह गई है। 1990 के बाद यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की संख्या 50 से नीचे गई है।

पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकवाद को काबू करने में काफी हद तक सफलता पाई है। पत्थरबाजों, अलगाववादियों और आतंक को वित्तपोषकों के खिलाफ की गई कार्रवाई ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है।
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नियंत्रण रेखा के उस पार बैठे आतंकवादी संचालकों के नापाक मंसूबों को भी नाकाम कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 2017 में इस क्षेत्र में करीब 350 आतंकी सक्रिय थे, लेकिन 2023 में यह संख्या 50 से नीचे पहुंच गई है।

तीन वर्षों में पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों ने तीन दशक पुरानी पाकिस्तान प्रायोजित पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म कर काफी हद तक आतंकवाद को नियंत्रित करने में कामयाबी पाई है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई।

इसी के तहत जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान और उसके गुर्गों द्वारा फैलाई गई अराजकता के दलदल से बाहर निकालने में काफी हद तक सफलता पाई है।

लोगों ने पाकिस्तान के प्रचार, एजेंटों को किया खारिज

श्रीनगर में जी-20 बैठक की मेजबानी इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान के प्रचार और उसके एजेंटों को खारिज कर दिया है। लोगों ने हिंसा को खारिज कर शांति को गले लगा लिया है। केंद्र के सभी फैसलों का समर्थन किया है और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

लोगों के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। यह एक संकेत है कि जम्मू-कश्मीर ने हिंसा, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, क्रॉस-फायरिंग और ग्रेनेड हमलों से पीड़ित एक आतंक प्रभावित क्षेत्र होने का टैग छोड़ दिया है। तीन साल पहले किसी ने सोचा तक नहीं था श्रीनगर दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के प्रतिनिधियों की मेजबानी करेगा। 

गृह मंत्री ने आतंकवाद के मोर्चे पर जताया संतोष

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने और अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई शुरू की। सुरक्षाबलों को आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

तीन वर्षों में आतंकियों और उनके समर्थकों को पकड़ा गया है और किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया है। आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ों के दौरान अन्य नुकसान को कम किया है, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। दूसरी ओर अलगाववादियों और उनके मददगारों की संपत्तियों को जब्त किया है।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा की समीक्षा में आतंकवादियों की संख्या सबसे कम होने पर संतोष जताया गया है। साथ ही शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थायी शांति के लिए शेष आतंकियों के खात्मे के लिए तेजी लाएं।

उम्मीद जताई है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की संख्या जल्द ही शून्य हो जाएगी। विशेष रूप से, जब केंद्र ने जम्मू-कश्मीर की 70 साल पुरानी यथास्थिति और तथाकथित विशेष दर्जे को समाप्त किया था तो कश्मीर आधारित राजनेताओं ने चेतावनी दी थी कि केंद्र शासित प्रदेश में अराजकता व्याप्त होगी।

लेकिन आज तक वे सत्ता में रहते हुए की गई गलतियों को गिना रहे हैं। ये राजनेता इस तथ्य से अवगत हैं कि आतंकवाद समाप्त होने वाला है, जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर विकास हुआ है और स्थानीय युवाओं ने बंदूकों को ना कहा है।

केंद्र सरकार ने तोड़े सभी मिथक

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अपनाई गई आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति ने सभी मिथकों को तोड़ दिया है। यह सिद्ध हो चुका है कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद सभी बुराइयों की जननी है और तीन दशकों के दौरान बनाए गए सभी नकारात्मक सोच को समाप्त करने के लिए इसका सफाया करना होगा।

2019 के बाद पथराव, सड़क पर विरोध प्रदर्शन, भारत विरोधी उपदेश देना और बंद करना इतिहास बन गया है। जम्मू-कश्मीर के लोग विशेष रूप से घाटीवासी बिना किसी डर और धमकी के चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। पर्यटन सीजन साल भर चलने लगा है। लोग श्रीनगर में होने वाली जी-20 बैठक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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