अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू/दोमाना। दोफाड़ युवा राजपूत सभा को एक करने की कोशिश कामयाब रही। सभा के प्रधान पद का विवाद सुलझ गया है। कोर कमेटी और विभिन्न बिरादरी के अध्यक्षों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पहले तीन महीने के लिए संजीव सिंह रिंकू को प्रधान चुन लिया गया। इसके बाद अगले दो वर्ष के लिए मंदीप सिंह इसके प्रधान रहेंगे। यह फैसला बुधवार को कांगड़ा किला पैलेस बरनाई जम्मू में करीब तीन घंटे की बैठक में मान-मनौव्वल, हंगामे और बिरादरी के वरिष्ठाें की मौजूदगी में लिया गया।
आखिरकार सभा को साधने में बड़ों की मशक्कत रंग लाई। सभा की ओर गठित विवाद समाधान समिति की घोषणा पर सभी बिरादरी अध्यक्ष व कोर कमेटी के 25 सदस्य पैलेस में पहुंचे थे। यहां मंदीप सिंह अपने धड़े के साथ पहुंचे थे क्योंकि चयन की प्रक्रिया 12 बजे शुरू की जानी थी। दूसरे धड़े से संजीव सिंह नहीं पहुंचे इसलिए कार्यवाही को पहले 12:30 बजे और फिर एक बजे तक के लिए आगे बढ़ाया गया। इस बीच करीब सबा एक बजे संजीव सिंह भी मौके पर पहुंच गए।
जब चयन प्रक्रिया की कार्यवाही शुरू हुई तो समिति ने दोनों उम्मीदवारों को पक्ष रखने के लिए कहा। दोनों की बात सुनने के बाद पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि संजीव सिंह पक्ष का प्रस्ताव आया है कि पहले एक वर्ष तक वह प्रधान बनाए जाएं। अगले दो वर्ष तक मंदीप सिंह प्रधान बनाए जाएं। इस प्रस्ताव को मंदीप सिंह ने मना कर दिया। मंदीप सिंह ने चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया जिसे संजीव ने मना कर दिया।
गतिरोध बढ़ता देख समिति ने फैसला लिया गया कि कोर कमेटी के सभी 25 सदस्य फैसले लेंगे कि कौन प्रधान बनेगा और कैसी व्यवस्था होगी। प्रधान बनाने को लेकर दोपहर 1.30 बजे से लेकर 2.30 बजे तक कमेटी मंथन करती रही। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद फैसला लिया गया कि 20 अगस्त से 20 नवंबर तक संजीव सिंह प्रधान रहेंगे। इसके बाद 21 नवंबर से अगले दो वर्ष तक मंदीप सिंह प्रधान बनाए जाएंगे।
इस फैसले पर भी दोनों धड़ों ने करीब एक घंटा और आपस में चर्चा की। इतने में विभिन्न बिरादरी के अध्यक्षों ने कहा कि कोर कमेटी के सदस्य अंदर रहें बाकी सब बाहर जाएं। इस पर कुछ लोगों ने हंगामा कर दिया। हालांकि, कुछ ही समय में वरिष्ठाें ने उन्हें शांत कर दिया। अंत कमेटी के फैसले पर दोनों ने सहमति जता दी।
बहुत हो गई बेइज्जती, फिर से शून्य से शुरू करना होगा
पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह ने चयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले कहा कि बिरादरी की बेइज्जती बहुत हो चुकी है। जितना मजाक बनना था हंसी उड़नी थी उड़ गई। युवा राजपूत सभा ने जो मुकाम 10 वर्षों में हासिल किया। वह एक महीने में खत्म हो गया। हम 100 पर थे और शून्य पर आ गए। अब फिर से सब कुछ शून्य से शुरू करना है। लिहाजा, युवा राजपूत सभा एकजुट होकर काम करे।
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जो फैसले के खिलाफ वह सभा का सदस्य नहीं
विवाद समाधान समिति के सदस्य पुष्पिंदर सिंह ने कहा कि अब जो फैसला लिया गया है उसके खिलाफ जो कोई भी जाएगा वह सभा का सदस्य नहीं होगा। तीन महीने के लिए संजीव सिंह प्रधान हैं और 21 नवंबर से मंदीप सिंह प्रधान होंगे। इस फैसले के खिलाफ जो जाएगा वह सभा और बिरादरी दोनों का गद्दार होगा। वहीं, दोनों प्रधानों संजीव सिंह व मंदीप सिंह ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का साथ देने का आश्वासन दिया।
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पगड़ी दोनों ने पहन रखी थी...
संजीव सिंह और मंदीप सिंह दोनों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे अपनी मर्जी से प्रधान नहीं बने थे। उन्हें कमेटी की ओर बनाया गया। दोनों ने पगड़ी पहनी थी। इसलिए दोनों के मान सम्मान का ध्यान रखा जाए। यही कारण रहा कि संजीव सिंह को तीन महीने और अगले दो वर्ष मंदीप सिंह को प्रधान बनाने का फैसला लिया गया ताकि दोनों का मान बना रहे।
प्रदेश में राजपूत समुदाय की लाखों की आबादी
युवा राजपूत सभा के पूर्व मीडिया प्रभारी विशाल सिंह का कहना है कि जम्मू कश्मीर में 25 से 30 प्रतिशत राजपूत समुदाय की आबादी है। युवा राजपूत में ही करीब 200 सदस्य विभिन्न पदों पर हैं। इसमें कोर कमेटी में 25, राज्य टीम में 70, एडवाइजरी बोर्ड में 50 सदस्य हैं। जिला टीमें भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।