साल 2015...। जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर अमिट छाप छोड़कर जा रहे इस साल ने राजनीति के कई रंग देखे। खंडित जनादेश के बाद नौ जनवरी से फरवरी तक राज्यपाल शासन रहा।
तमाम जोड़तोड़ की कोशिशों के बीच परस्पर वैचारिक मतभेदों वाली पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी। एक मार्च 2015 का दिन रियासत के लिए ऐतिहासिक दिन रहा।
राम माधव-द्राबु में 55 दिनों तक चले गहन मंथन ने गठबंधन की बुनियाद रखी। हालांकि गठबंधन सरकार बनने के बाद वैचारिक मतभेद सामने आते रहे।