फुदकती-इठलाती गौरैया तो आपने देखी होंगी। याद कीजिए, कितनी तरह की गौरैया को आपने देखा है। पड़ गए न चक्कर में। पूरे देश में गौरैया की आठ प्रजातियां हैं। इनमें से जम्मू-कश्मीर में चार प्रजातियों की गौरैया का बसेरा है।
शहरी इलाकों में तो इनकी संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इनकी चहचहाहट बरकरार है। गौरैया की घटती संख्या और उसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल आज के दिन यानी 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
जम्मू विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग में प्रोफेसर और जम्मू-कश्मीर (जेएंडके) बर्ड लाइफ के संस्थापक परमिल कुमार करीब 20 साल से पक्षियों के संरक्षण पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गौरैया की जम्मू-कश्मीर में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें लाल, घरेलू, सिंध और पीले गले वाली गौरैया शामिल है। लाल गौरैया आमतौर पर पहाड़ों में, सिंध गौरैया पानी के किनारे, घरेलू गौरैया इंसानों के आसपास और पीले गले वाली गौरैया जंगलों में पाई जाती है।
वह कहते हैं, मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन और फसलों में कीटनाशकों के बढ़ता प्रयोग गौरैया के लिए चिंताजनक है। परमिल कहते हैं इससे इनकी अंडे देने की क्षमता कम होती है।वन विभाग में रेंज अफसर के पद पर तैनात परवेज अहमद भी पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं।
परवेज बताते हैं कि पक्षी दो तरह के होते हैं। एक जो जंगलों में रहते है और दूसरे जो इंसानों के आसपास रहते हैं। दोनों ही तरह के पक्षियों के कम होने की सबसे बड़ी वजह उनके घरों का उजड़ना है। जंगलों में इन्सानों की आवाजाही से और शहरों में लगातार पक्के घरों के निर्माण से पक्षियों के सामने अपने घर बचाने का संकट है। हालांकि, गौरैया की बात करें तो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या स्थिर है, क्योंकि वहां उन्हें घोंसले बनाने और खाने-पीने में समस्या नहीं आती।
गौरैया को पालना भी है अवैध, हो सकती है जेलपरमिल कुमार ने बताया कि गौरैया देश में जंगली पक्षी मानी जाती है। हालांकि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है। यानी कि इसे संकटग्रस्त नहीं माना जाता। इसे केवल कानूनी रूप से संरक्षित किया गया है।
इसलिए इसका शिकार करना, पकड़ना, बेचना या पालना गैरकानूनी है। गौरैया के घोंसले और अंडों को नुकसान पहुंचाना या नष्ट करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने पर जुर्माना और जेल भी हो सकती है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इसके व्यापार और शिकार की निगरानी करता है।