"विभागीय एक्शन प्लान में वाहनों की लाइफ कम करने की सिफारिश की गई है। इसमें 25 वर्ष से कम करके 15 वर्ष की जाएगी। इसके अलावा लकड़ी के बदले एलपीजी गैस का प्रयोग, औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण को प्यूरीफाई करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण स्थापित करने आदि उपायों के साथ वायु प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है।"-वैज्ञानिक हेड लेबोरेटरी जम्मू डिवीजन व राज्य बोर्ड समीक्षक डॉ. यशपाल
अस्थमा और सांस संबंधी रोगियों के लिए आफत
सीडी अस्पताल के एचओडी डा. राहुल गुप्ता के अनुसार वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों में ब्रोंकाइटिस (खांसी), एलर्जी रिनटिक (नाक संबंधी एलर्जी), क्रानिक अबस्ट्रटिव (हवा संबंधी रोग) की शिकायत बढ़ी है। प्रदूषण से सांस संबंधी मरीजों के लिए आफत बढ़ी है।
राज्य में हर साल 70 हजार नए वाहन आ रहे
रियासत में हर साल करीब 70 हजार छोटे बड़े नए वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। दूसरे राज्यों से भी हजारों वाहनों की जम्मू-कश्मीर में रोजाना आमद हो रही है।
ओपीडी में 20 फीसदी तक अस्थमा के मरीज
पिछले कुछ साल में सीडी अस्पताल जम्मू में 15-20 प्रतिशत तक ओपीडी में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां सामान्य में 250-300 मरीज प्रतिदिन अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें 40-50 मरीज अस्थमा से पीड़ित होते हैं। इसके अलावा अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों में भी बढ़ोतरी हुई है।