जम्मू। प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी के बजाय स्वरोजगार को आजीविका का माध्यम बना रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 94.1 प्रतिशत महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं जबकि नौकरी करने वाली महिलाओं का प्रतिशत केवल 5.8 है। 0.1 का आंकड़ा मजदूरी पर है जो न के बराबर है।
वूमेन एंड मेन इन इंडिया रिपोर्ट के आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश के गांवों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, पशुपालन, बागवानी, डेयरी, हस्तशिल्प और अन्य स्वयं संचालित कार्यों पर आधारित है। कुछ वर्षों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के विस्तार ने भी महिलाओं को घर के पास रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराए हैं। शहरी क्षेत्रों में 52.3 प्रतिशत महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं जबकि 46.8 प्रतिशत महिलाएं नौकरियां कर रही हैं। शहरी क्षेत्रों में मजदूरी करने वाली महिलाओं की संख्या काफी कम (0.9 प्रतिशत) है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश की महिलाएं बड़ी संख्या में आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं लेकिन उनका सबसे बड़ा सहारा स्वरोजगार ही है।
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खुद के काम को जरिया बनाया। न समय की बंदिश है और न ही सफलता की सीमा। अन्य महिलाएं भी जुड़कर आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम कर रही हैं।
- मुनीश देवी, कटड़ा
आज भी नौकरियों का अभाव है। स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनीं। 2019 में ऑर्गेनिक साबुन, भगवान के पोशाक, कलीरा सहित अन्य उत्पादों का निर्माण शुरू किया।
- सपना देवी, रियासी
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यदि हुनर है तो आप स्वरोजगार चला सकते हो। प्रशासन को कौशल विकास के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास करने चाहिए।
- हरप्रीत कौर, जम्मू