मस्सरत के अनुसार वो श्रीनगर के पुराने शहर की रहने वाली हैं जो अक्सर पत्थरबाजी और हिंसक प्रदर्शनों के लिए सुर्खियों में रहता है। बचपन से ही वह यह सब देखती आई हैं। बचपन में ऐसी घटनाओं को कवर करने के लिए अक्सर पुरुष फोटो जर्नलिस्ट को देख उनके मन में एक जुनून जागा। उन्होंने ठान ली कि वो फोटोजर्नलिज्म को अपने पेशे के तौर पर चुनेंगी।
मस्सरत ने बताया कि उनके लिए इस पेशे को चुनना इतना आसान नहीं था क्योंकि वह एक ऐसे रूढ़िवादी समाज का हिस्सा थीं जहां महिलाओं का इस पेशे में जाना सही नहीं समझा जाता था। गौरतलब है कि मससरत की कामयाबी को देख कई कश्मीर की युवतियाँ भी इस पेशे में आना चाहती हैं। उनको लेकर मस्सरत का कहना है कि लड़कियों को अपने जुनून को नहीं दबने देना चाहिए।