- 500 से अधिक युवतियां व महिलाएं सेवा, सुरक्षा व संस्कार की भावना से प्रदेश में निभा रहीं अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। दुर्गा वाहनी विश्व हिंदू परिषद (विहिप) इकाई का एक प्रमुख अंग है। यह संगठन नारी शक्ति को आत्मरक्षा के गुर देकर समाज के तानेबाने से लड़ना सिखा रहा है।
जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख की संयोजिका शीतल दत्त दुर्गा का कहना है कि दुर्गा वाहिनी जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में युवतियों व महिलाओं को सेवा, सुरक्षा और संस्कार की भावना से प्रशिक्षण दे रही हैं। जम्मू संभाग के कटड़ा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संगठन में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में 500 से अधिक दुर्गा वाहनी बहने सामाजिक स्तर पर सेवा, सुरक्षा और संस्कार का लक्ष्य बनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।
शीतल ने कहा कि हिंदू समाज में पुनर्जागरण, राष्ट्र-धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संगठन की स्थापना 1991 में की गई। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए महिलाओं को प्रेरित करना और शारीरिक, मानसिक रूप से प्रबल बनाना है। इसमें 15 से 35 वर्ष की महिलाओं व युवतियों को शामिल किया जाता है। प्रशिक्षण लेने वाली युवतियों को संयुक्तिका कहा जाता है, जो विहिप की कार्यसमिति इकाई की सदस्य के रूप में काम करती हैं। इनकी नियुक्ति परिषद की संबंधित इकाइयों के परामर्श पर की जाती है। (संवाद)
दुर्गा वाहनी की युवतियां खास वर्दी में
शीतल ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर में सभी महिलाओं व युवतियों को दुर्गा वाहिनी की वर्दी देकर प्रेरित किया जाता है। इसमें सफेद सलवार, सफेद कुर्ता, केसरिया चुनरी, सफेद जूता (कपड़े का) और मोजे शामिल हैं। दुर्गा वाहिनी के रूप में शिलालेख के साथ एक बेल्ट भी दिया जाता है। हर सदस्य की शारीरिक सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से योग, दंड (लाठी कला), छुरिका (चाकू संचालन कला), बाधा पार, यष्टि (डंडे का उपयोग), लक्ष्य वेध, तलवारबाजी आदि कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। शीतने ने सेंदश दिया कि युवतियां अधिकतर स्वनिर्मित वस्तुओं का इस्तेमाल करें।