रिजर्वेशन आफ बैकवर्ड एरिया (आरबीए) और एक्चुअल लाइन आफ कंट्रोल (एएलसी) के तहत आरक्षित सीटों पर लगे डाक्टरों की मनमानी जारी है। इनमें अधिकांश डाक्टर अपनी मनपसंद जगहों या शहरी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। नियमों के अनुसार ऐसे डाक्टरों को अपना सात साल का कार्यकाल बैकवर्ड एरिया में देना जरूरी है।
स्वास्थ्य महकमा ऐसे डाक्टरों की सूची तैयार कर रहा है, जो तय कार्यकाल से पहले ही दूसरी जगहों पर एडजेस्ट हैं। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार पहले चरण में 11 डाक्टरों को बैकवर्ड क्षेत्र में वापस भेजा गया है।
बैकवर्ड क्षेत्र में सात साल का कार्यकाल पूरा न करने वाले अन्य डाक्टरों की सूची तैयार की जा रही है। सब रूल (2) रूल 3 जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन एक्ट, 2004 के तहत डाक्टरों की आरक्षित सीटों पर आरबीए/एएलसी पर नियुक्ति की जाती है।
ग्यारह डाक्टरों को वापस भेजा गया
इन नियुक्तियों का उद्देश्य सीमावर्ती और पिछड़े क्षेत्रों में लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाना है, लेकिन मजेदार बात यह है कि इनमें अधिकांश डाक्टर अपनी पहुंच से शहरी अस्पतालों में ही बैठे हुए हैं, जिससे बैकवर्ड और सीमांत क्षेत्रों में लोगों को उचित चिकित्सा सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग जेएंडके की ओर से ग्यारह डाक्टरों की सूची जारी करके उन्हें तत्काल प्रभाव से बैकवर्ड क्षेत्र में सेवाएं देने के आदेश दिए गए हैं। इनमें आधे से ज्यादा डाक्टर एमओ जीएमसी जम्मू में ही तैनात थे, जबकि कुछ पीएचसी कानाचक्क, डीएच कठुआ, डीएच उधमपुर, एएच महानपुर और ईएच बनिहाल में तैनात थे।
इन डाक्टरों को शीघ्र बैकवर्ड क्षेत्र में अपने सात साल का कार्यकाल पूरा करने को कहा गया है। नई नियुक्ति में इन डाक्टरों को सीएचसी चिनैनी, सीएचसी गंदोह, सीएचसी मंडी, पीएचसी मंजाकोट, सीएचसी गूल, सीएचसी बनिहाल, पीएचसी जोगवान, एनटीपीएचसी चकरा (हीरानगर), पीएचसी उखराल और पीएचसी मंगित में भेजा गया है।