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Jammu News: वैश्विक तापमान बढ़ने से हिमनद झीलें बनने का खतरा

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जम्मू-कश्मीर में 24 झीलों की पहचान, इनके फटने से हो सकती है तबाही
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में वैश्विक तापमान में वृद्धि से ग्लेशियर पिघलने से कई हिमनद झीलें बनने का खतरा बढ़ रहा है। इनके अचानक टूटने से एक साथ लाखों क्यूबिक मीटर पानी और मलबा निकलने पर भारी तबाही हो सकती है। केंद्रित ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ निगरानी समिति (एफजीएमसी ) ने प्रदेश में 14 उच्च जोखिम वाली 24 हिमनद झीलों की पहचान की है।
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सरकार का दावा है कि प्रदेश में ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं। शेषनाग और सोनसर जैसी उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. सुनील धर के नेतृत्व में किश्तवाड़ जिले में तीन उच्च जोखिम वाली झीलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें मुंडीकसर, हंगू और अनाम झील शामिल है। इनके फटने के दाैरान जोखिमों को कम करने के लिए डेटा संग्रह, उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों की पहचान व प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों पर काम किया जा रहा है। सरकार ने शमन कार्यक्रम का विस्तार करने, भारी वर्षा के लिए पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार करने, एनडीआर, एसडीआरएफ और आईटीबीपी सहित हितधारकों को किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उत्तरी-पश्चिमी हिमालय में ग्लेशियल झील गंगाबल का भी आकलन किया गया है।
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