जम्मू। मौसम विज्ञान के क्षेत्र में देश-दुनिया में तेजी से काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर भी इससे अछूता नहीं है। तकनीक और उपकरणों के बल पर मौसम के पूर्वानुमान की सटीकता में यहां उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दस साल पहले जहां मौसम के पूर्वानुमान की सटीकता 30 से 40 फीसदी होती थी, अब यह 75 फीसदी तक पहुंच गई है। इस पूर्वानुमान को और अधिक सटीक बनाने के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, श्रीनगर से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक मुख्तार अहमद ने बताया कि प्रदेश में मौसम विज्ञान विभाग का एक मुख्य केंद्र है, जो श्रीनगर में स्थित है। इसके साथ ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आठ उपकेंद्र हैं। अभी प्रदेश में जम्मू, श्रीनगर और बनिहाल में तीन स्थानों पर डॉपलर रडार स्थापित हैं।
अगले साल तक दक्षिण कश्मीर, उत्तर कश्मीर, डोडा-किश्तवाड़ और पुंछ-राजोरी में एक-एक डॉपलर रडार और लगाया जाएगा। सरकार ने जम्मू में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की है, जो पूरे उत्तर भारत का केंद्र होगा। इससे प्रदेश की मौसम विज्ञान सेवाओं में और सुधार आएगा। प्रदेश में जिन जिलों में मौसम विज्ञान केंद्र नहीं हैं, वहां भी ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
लद्दाख के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक सोनम लोटस ने बताया कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश में बहुत काम हुआ है। ब्लॉक स्तर पर मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी मिल रही है। हालांकि, अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी खेती और पर्यटन जैसे क्षेत्र मौसम पर निर्भर हैं। प्रदेश में कई ऐसे दुर्गम इलाके हैं, जहां के लिए मौसम की सटीक भविष्यवाणी बेहद चुनौतीपूर्ण है। हाल ही में जम्मू विश्वविद्यालय व शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने मौसम विभाग के साथ शोध को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता किया है। उम्मीद है कि इससे प्रदेश में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी।