जंगल हो रहे पेड़ों से खाली, बढ़ रहा तबाही का मंजर
पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक ओपी शर्मा का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से लगातार बादलों की बनावट में परिवर्तन आ रहा है। पहले जंगलों में खूब पेड़, घास, झाड़ियां आदि होते थे, जिससे बादल फटने के दौरान ऊपर से तेज दबाव से आने वाले पानी की गति कम हो जाती थी, लेकिन अब पहाड़ों पर भी पेड़ों की लगातार कटान से बादल फटने पर पानी अपने साथ मलबा लेकर नीचे आ रहा है, जिससे तबाही का स्तर बढ़ रहा है।
एक घंटे में बरसता है कहर बनकर पानी
एक ही घंटे में आसमान से 100 मिलीमीटर पानी बरस जाताबादल फटने की घटना में एक सीमित जगह पर बादलों से वर्टिकल रूप से एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर तक बारिश हो जाती है। यह बारिश अचानक बाढ़ का रूप ले लेती है। पानी का दबाव इतना होता है कि उसके आगे आने वाली हर चीज बहकर चली जाती है और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देती है। इस स्थिति में एक सीमित जगह पर हवा में भारी नमी रहती है, जिससे उसी जगह पर बादलों का सारा पानी गिर जाता है।