जम्मू कश्मीर के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कई जगह बारिश से बुधवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ गया। वीरवार को भी रियासत में कुछ स्थानों पर बर्फबारी या बारिश के आसार हैं। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार दस फरवरी से रिसासत में मौसम साफ रहेगा।
पहलगाम, गुलमर्ग में करीब एक सेंटीमीटर तक हिमपात हुआ। इसके अलावा जम्मू संभाग सहित कई इलाकों में बारिश भी हुई और कभी बादल तो कभी धूप खिलने का सिलसिला दिन भर चलता रहा। उधर जम्मू श्रीनगर नेशनल हाईवे को सुबह जम्मू से श्रीनगर के लिए एक तरफा खोला गया, लेकिन यह सिलसिला सुबह 11 बजे तक ही बना रह सका।
हाईवे पर जाम और कई जगह पर पस्सियां गिरे होने और फिसलन से ग्यारह बजे के बाद किसी भी गाड़ी को जम्मू से जाने की अनुमति नहीं दी गई। रियासत में माइनस 9.7 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ लेह सबसे ठंडा क्षेत्र रहा। गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान माइनस 7.0 रिकार्ड किया गया है।
श्रीनगर में मौसम साफ
श्रीनगर
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वहीं श्रीनगर समेत अन्य जगहों पर न्यूनतम तापमान में सुधार आने लगा है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। काजीगुंड में 1.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।
जम्मू में अधिकतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस रहा। कश्मीर घाटी में बुधवार को मौसम साफ रहने के चलते श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाड़ियों की आवाजाही को चालू रखा गया।
ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ जगहों पर पस्सियां गिर आने के कारण राजमार्ग पर ट्रैफिक जाम रहा, लेकिन मौसम साफ रहने के चलते जम्मू से श्रीनगर की ओर गाड़ियों को रवाना किया गया। वहीं श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी सभी उड़ानें सही ढंग से संचालित की गईं।
अगले 48 घंटे में हिमस्खलन की चेतावनी
अगले 48 घंटे में हिमस्खलन की चेतावनी
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मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक घाटी के ऊपरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए हिमस्खलन की चेतावनी जारी करते हुए उन्हें सतर्कता बरतने की अपील की है। एक अधिकारी के अनुसार मौसम में बदलाव के साथ ही ऊपरी इलाकों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ जाएगा और कभी भी कहीं भी हिमस्खलन हो सकता है।
इसलिए लोगों से अपील है कि वे एहतियात बरतें और उन इलाकों में जाने से गुरेज करें, जहां हिमस्खलन का खतरा है। उन्होंने बताया कि कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल, शोपियां, पुलवामा जिलों के ऊपरी इलाकों में हिमस्खलन का ज्यादा खतरा है।