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चिनाब का जलस्तर खतरे के निशान से तीन गेज कम

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अखनूर के जियो पेता घाट पर भरा चिनाब दरिया का पानी।
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अखनूर। पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश से चिनाब दरिया का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुुंच गया है। प्रशासन ने चिनाब के बढ़ते जलस्तर को लेकर हिदायतें जारी की हैं।
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शनिवार सुबह आठ बजे चिनाब दरिया का जलस्तर 25 गेज था। इसके बाद 10 बजे जलस्तर 26.5 हो गया, जबकि 12 बजे जलस्तर 29 गेज पहुंच गया। दोपहर दो बजे 29 गेज पहुंच गया, जो खतरे के निशान से तीन गेज कम था। इसके उपरांत दोपहर तीन बजे 28 गेज पानी का स्तर पर आ रहा, जो लगातार कम हो रहा था।
अखनूर के चिनाब दरिया के जियो पोता, चंदिया और हरि मंदिर घाट पर पानी आ गया। वहीं प्रशासन ने हिदायतें जारी करके लोगों को चिनाब दरिया के पास नहीं जाने की हिदायतें दीं। लोगों को दरिया किनारे जाने पर पाबंदी लगा दी। दोपहर बाद पानी का जलस्तर कम होने लगा। वहीं दरिया का पानी कम होने पर दरिया के आसपास रहने वाले लोग खासतौर पर गुज्जर समुदाय के लोगों ने राहत की सांस ली।
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फोटो
बारिश का पानी लोगाें के घरों में घुसा
विजयपुर। मूसलाधार बारिश से लोगों ने गर्मी से राहत ली है। ज्यादा बारिश पड़ने के कारण पानी लोगों के घरों में घुस गया, जिस कारण लोगों को कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय निवासी रमेश कुमार, धर्मपाल, सुभाष सिंह आदि ने बताया कि सरकार द्वारा जो नाले, खड्डे, चोयिया आदि बनाई गईं, वहां से बारिश का पानी गुजर जाता था, लेकिन भूमाफिया ने खड्डे नाले चोईयों पर कब्जा कर रखा है, जिसके चलते यह नाले खड्डे सिकुड़ चुके हैं। बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। लोगों ने सांबा जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी खड्डे नालों और चोईयों पर जो कब्जा है उनको खाली कराया जाए। संवाद
बारिश से खेतों में जल भराव
खाली होने का किसान कर रहे इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। बीत तीन दिनों से हो रही बारिश शनिवार को भी जारी रही। दोपहर बाद करीब दो बजे के बाद मौसम साफ होने से धूप में निखार आना शुरू हो गया।
किसानों के अनुसार खेतों में जलभराव होने से धान की फसल को काफी लाभ पहुंचा है, मगर इसके साथ-साथ घास भी काफी उग चुकी है। जो फसल के उत्पादन को प्रभावित करती रहेगी।
देस राज, विजय कुमार, उत्तम चंद, गरीब दास व नत्थू राम आदि किसानों के अनुसार चार-पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश से धान फसल में काफी निखार आने लगा है, मगर इसी के साथ ही खेतों में घास में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है, जिसे कीट नाशक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है, नहीं तो फसल उत्पादन में कमी रहेगी।
कहा, जब तक खेतों में जलभराव रहेगा तब कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कर सकते, अगर कर भी दिया तो भी कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि जब तक खेतों में पानी रहेगा कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का असर नहीं होता। इसके लिए खेतों में मामूली सी नमी व छिड़काव के बाद कम से कम दो दिन तक लगातार खिली धूप का रहना जरूरी होता है। तभी इसका सही लाभ मिल सकता है। इसीलिए अब खेतों से पानी निकलने का इंतजार किया जा रहा। उसके बाद ही कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा।
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