जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और केद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने नेशनल कांफ्रेंस के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनते ही 30 दिनों के अंदर हम क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए प्रस्ताव पारित करेंगे।
ज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर में बुधवार से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। राज्यपाल की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने सोमवार को ही राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी थी। अब इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर के बाद राज्य में राज्यपाल शासन खत्म होने के साथ ही राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। इससे पहले साल 1990 से अक्टूबर 1996 तक जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन रहा था।
राष्ट्रपति शासन लागू हो जाने के बाद राज्यपाल की सारी विधायी शक्तियां संसद के पास रहेंगी और अब कानून बनाने का अधिकार संसद के पास होगा। नियमानुसार राष्ट्रपति शासन में बजट भी संसद से ही पास होता है। इस वजह से राज्यपाल शासन में ही लगभग 89 हजार करोड़ रुपये का बजट पास करा लिया गया।
राज्यपाल शासन में कानून बनाने तथा बजट पास करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है। राष्ट्रपति शासन में अब राज्यपाल अपनी मर्जी से नीतिगत और संवैधानिक फैसले नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें केंद्र से अनुमति लेनी होगी।