जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और डीपीएपी के अध्यक्ष गुलाम नबी आज़ाद गुरुवार को श्रीनगर में
संसद की कार्यवाही नहीं होने देना या वॉक आउट कर जाना मतलब विरोध करना नहीं बल्कि सत्ता पक्ष को समर्थन देना होता है।
क्योंकि जब विपक्ष सदन में ही नहीं होगा तो सत्ता पक्ष आसानी से अपनी मनमर्जी का कोई भी बिल पास कर सकता है। इसलिए सदन चलने देना चाहिए। मौके पर अपनी बात रखनी चाहिए। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के मु्दे पर खुल कर बहस करनी चाहिए। सही-गलत का विरोध और समर्थन करना चाहिए।
यह बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पद्म भूषण गुलाम नबी आजाद ने कही। वह गुरुवार को गांधी ग्लोबल फेमिली श्रीनगर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। गुलाम नबी आजाद इस संस्था के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वह पूर्व में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष रहे और कई दफा सांसद भी रहें लेकिन कभी भी सदन को चलने से नहीं रोका। विरोध किया लेकिन जनविरोधी मु्द्दों का। उन प्रस्तावों का विरोध किया जो देशहित में नहीं था।
दाछीगाम में सेना द्वारा आतंकियों को मारे जाने की प्रशंसा करते हुए े कहा कि इसके लिए फौज बधाई की पात्र है लेकिन ध्यान रहे कभी गलत एनकाउंटर भी नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने गांधी जी का 100वां जन्मदिन समारोह श्रीनगर में ही आयोजित किया था जिसमें देश के कोने-कोने से आए लोग शामिल हुए थे।
गांधी जी ने उस समय कहा था कि ऐसी विषम परिस्थिति में सिर्फ कश्मीर से रोशनी की किरण नजर आती है। गुलाम नबी ने समारोह में सामाजिक क्षेत्र एवं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में योगेश्वर सिंह रैना, काजी उमर, रफीक अहमद वानी, सलीमा परवीन, दिल अफरोजा, बबिता बट, रोमा वानी, अमिता चांदपुरी प्रमुख रूप से शामिल रहे।