- विभाग बेखबर, शहर के कई मोहल्लों में लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे
- कुल 3.50 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति, नहीं हो रही पाइपों की मरम्मत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के कई मोहल्ले में लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जलशक्ति विभाग पेयजल की 54 एमजीडी डिमांड के सापेक्ष 51 एमजीडी पानी की आपूर्ति कर पा रहा है। पाइपलाइनों में लीकेज से रोज 35 लाख लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। विभाग की लापरवाही से शहर के 10 प्रतिशत हिस्से में लोगों के घरों तक पानी पहुंचने से पहले नालियों में बह जा रहा है। ज्यूल चौक, मुट्ठी, राजपुरा चुंगी सहित अन्य इलाकों में लीकेज की समस्या विभाग बंद नहीं कर पा रहा है।
रविवार को पड़ताल में सामने आया कि ज्यूल चौक, मुट्ठी, राजपुरा चुंगी में 90 से अधिक स्थानों पर पाइपलाइनों में लीकेज है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर काॅलोनी और मोहल्लों में पाइपलाइन फटने और पुराने बुनियादी ढांचे से स्थिति और विकराल हो गई है। मांग के अनुसार लोगों को पेयजल नहीं मिल पा रहा, जहां सप्लाई पहुंच भी रही है, वहां प्रेशर इतना कम है कि टंकी तक नहीं भर पाती। राजपुरा चुंगी में मेन पाइप से लगातार पानी बह रहा है। मुट्ठी में भी पाइप लीक है। ज्यूल चौक में कैनाल हेड और अन्य इलाकों को जाने वाली मुख्य पाइपलाइन भी जर्जर है। तवी पुल के पास भी सड़क निर्माण के कारण पाइन टूट गए हैं। इससे भी पानी बर्बाद हो रहा है।
नाली में बह रहा पानी
गर्मी में लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। ऊपर से लीकेज के कारण समस्या और भी बढ़ गई है। पाइप बदलने का अभी तक 40 फीसदी काम हुआ है। शहर में दशकों पहले डाले गए पाइपों से ही आपूर्ति हो रही है।
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प्रति व्यक्ति 135 की जगह 90 लीटर पानी की आपूर्ति
शहर में पीएचई को प्रति व्यक्ति के हिसाब से 135 लीटर पानी की आपूर्ति करने का नियम है। पानी की बर्बादी की वजह से आपूर्ति मात्र 90 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में 155 लीटर की जगह मात्र 80 लीटर ही आपूर्ति हो रही है।
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यहां से लिफ्ट होता पानी
सितली, धोथलीं और पंजतीर्थी में तवी नदी से पानी लिफ्ट किया जा रहा है। 260 ट्यूबवेल के माध्यम से भी पानी की आपूर्ति एक तिहाई शहर में होती है। कुल 350 करोड़ लीटर पानी यानी 54 (एमजीडी) की आपूर्ति ही हो पाती है।
इन स्कीमों पर नहीं बनी सहमति
चिनाब वैली पानी स्कीम, भगवती और त्रिकुटा नगर स्कीम सहित अन्य परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव बने लेकिन केंद्र सरकार से बजट नहीं मिला। ऐसे में इस पर काम शुरू नहीं हो पाया। 2020 में इन स्कीमों पर काम बंद हुआ। इस कारण भी पानी शहर में जरूरत के हिसाब से नहीं मिल रहा है।
इन मोहल्लों में तीसरे दिन आता पानी
वार्ड 66 से 70 में आने वाले मोहल्लों में सप्ताह में तीसरे दिन आपूर्ति होती है। इलाके शहर में है मगर आपूर्ति ग्रामीण पेयजल स्रोतों से होती है। इस कारण लोगों को जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पाता। कासिम नगर, शेख नगर, कालिका कालोनी, गोरखा नगर, बाहु फोर्ट, बठिंडी, सुजवां इलाकों में तीसरे दिन पानी मिलता है। इन इलाकों में शहर से ही पानी की आपूर्ति होती है।
अमृत-2 प्रोजेक्ट पूरा होने से समाधान की उम्मीद
अमृत-2 चरण के तहत 2028 तक काम जारी रहेगा। पुराने पाइपों की जगह नए पाइप बिछाए जा रहे हैं। साथ ही ओवरहेड टैंक सहित अन्य काम करवाए जा रहे हैं। अभी तक 40 फीसदी तक काम पूरा हुआ है। शेष काम के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
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रोज मिल रहीं 30 से 40 शिकायतें
पाइप लाइन से पानी लीकेज को लेकर जलशक्ति विभाग को रोज औसत 40 शिकायतें मिल रही हैं। शिकायत मिलने 24 घंटे में समस्या का समाधान करना होता है, लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सुस्ती की वजह से मात्र दो चार शिकायतें ही दूर हो पा रही हैं।
मरम्मत में देरी, जनता पर भारी
शहर में एक ओर नई जलापूर्ति योजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, वहीं मौजूदा पाइपों की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। पुराने और जर्जर हो चुके पाइप दबाव झेल नहीं पाते और जगह-जगह से फट जाते हैं। इस रिसाव के कारण न केवल पानी की बर्बादी हो रही है, बल्कि सड़कों के टूटने और जलभराव के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
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शहर में जरूरत के हिसाब से पानी मुहैया करवाया जा रहा है। पानी स्टोरेज क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। जल्द ही समस्या का निदान किया जाएगा।
- संजीव गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग