सूर्य पुत्री तवी के आंचल से जम्मू शहर को प्रतिदिन करीब 26 मिलियन गैलन पानी मुहैया होने के अलावा भवन निर्माण के लिए रेत, बजरी, पत्थर का भी दोहन किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले तवी को कुछ देना तो दूर उल्टे इसमें गंदगी उड़ेल-उड़ेल कर इसके अस्तित्व पर ही खतरा बना दिया है।
अब तवी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए पुकार रही है। नियम कानून को ताक पर रखकर जिसने चाहा तवी का दोहन किया, अतिक्रमण किया। वाहनों की संख्या को देखते हुए शहर में ही चार पुल बन गए। इससे हालत यह हुई कि तवी का आंचल तो सिकुड़ा ही, इसमें जल स्तर में भी रिकार्ड गिरावट आ गई है।
तवी में ही जम्मू में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कृत्रिम झील परियोजना पर भी काम चल रहा है। 55 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है। बहरहाल जल स्तर में निरंतर गिरावट और तवी में नालों की गंदगी के निरंतर गिरने और साफ-सफाई के लिए पुख्ता कदम न उठाए जाने की वजह से कृत्रिम झील तक के निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गर्मियों में तो हालत यह हो जाती है कि आसानी से तवी को पार किया जा सकता है। हालत तो यह हो गई है कि पंद्रह से बीस साल पहले तक यहां लोग तवी के निर्मल पानी में नहाते थे, वही अब नहाना तो दूर आसानी से मुंह हाथ धोना भी मुश्किल भरा हो गया है।