मौजूदा गर्मी के सीजन में बिजली-पानी की किल्लत और अघोषित कटौती को झेलना ही पड़ेगा। आलम तो यह है कि चाहे बिजली परियोजनाओं का मामला हो या फिर पेयजल परियोजनाओं का, बिजली-पानी की मांग जिस तेजी से बढ़ती जा रही, उस तेजी से उत्पादन नहीं बढ़ रहा। इस वजह से शार्टफाल बढ़ रहा है और अघोषित कटौती से उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी ही पड़ेगी।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत की अपनी पनबिजली परियोजनाओं में क्षमता से काफी कम उत्पादन हो पा रहा है। कुल 21 पनबिजली परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता 761.96 मेगावाट की है और इन परियोजनाओं में करीब आधा दर्जन परियोजनाओं में अलग-अलग कारणों से उत्पादन ठप पड़ा है। इस वजह से रियासत में 550 मेगावाट के करीब ही बिजली उत्पादन हो पा रहा है।
बिजली की मांग बढ़कर 2600 मेगावाट तक जा पहुंची है। 1000 से 1200 मेगावाट तक उत्तरी ग्रिड से बिजली खरीदने के बावजूद रियासत में बिजली का शार्टफाल लगातार बढ़ता जा रहा है। पेयजल की मांग बढ़कर 46 मिलियन गैलन डेली तक पहुंच चुकी है, जबकि उपलब्धता 42.5 मिलियन गैलन प्रतिदिन ही है। पेयजल की समस्या से निजात दिलाने के लिए चिनाब पेयजल परियोजना का खाका तैयार किया गया था, लेकिन एशियन डेवलपमेंट बैंक से फंड न मिलने की वजह से अब जापान बैंक के लोन पर परियोजना निर्भर होकर रह गई है।
अगर जापान बैंक से लोन मिला तो ठीक नहीं, तो इस परियोजना का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटक जाएगा। उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह के अनुसार बिजली हो या पेयजल के परिदृश्य में सुधार लाने के लिए उत्पादन बढ़ाने के अलावा बिजली आपूर्ति में सुधार लाने की कवायद शुरू की गई है। आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।