जम्मू। मंदिरों का शहर रविवार को सीजन के पहले घने कोहरे की चादर में लिपटा रहा। तड़के की शहर और आसपास के इलाकों में कोहरा छा गया। कोहरे के कारण विजिबिलिटी भी कम रही। ठिठुरन भी बढ़ गई है। इससे सुबह कई क्षेत्रों में सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। दोपहर को मौसम खुलने पर धूप खिली, लेकिन देर शाम दोबारा हल्का कोहरा कई इलाकों में छा गया। कोहरे के साथ ओस पड़नी शुरू हो गई है, जिससे बाहर के स्थलों पर जल की परत जमा होने लगी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में भी कोहरे की चादर बिछी रहेगी। इससे सफर में देरी के साथ सड़क हादसों की आशंका बढ़ेगी।
रविवार की छुट्टी होने पर शहरवासियों की जब सुबह नींद खुली तो चारों ओर कोहरा पाया। बच्चों के साथ अन्य लोगों ने सीजन के पहले कोहरे का बाहर आकर लुत्फ भी लिया। पुराने शहर के अलावा विक्रम चौक, तवी पुल, गुज्जर नगर, सर्कुलर रोड, सिद्दड़ा, जानीपुर, तालाब तिल्लो, आरएस पुरा सहित सीमा से सटे क्षेत्रों पर कोहरे का अधिक असर दिखा। सीमांत खुले इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ था। इससे 100 मीटर की दूरी पर साफ देखना मुश्किल हो रहा था। कोहरे के कारण बाजारों में निर्धारित समय से थोड़ी देरी से प्रतिष्ठान खुले। दोपहर 12 बजे के बाद धूप खिलने पर कोहरे की चादर हटी। लेकिन धूप के बीच ठंड का भी अहसास हुआ।
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कोहरा बिगाड़ सकता है सेहत
बच्चों-बूढ़ों का रखें खास ध्यान
खांसी, जुकाम और बुखार होने की आशंका बढ़ी
जम्मू। कोहरा आपकी सेहत बिगाड़ सकता है, बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। मौसम में आए बदलाव से खांसी, जुकाम और बुखार होने की आशंका बढ़ गई है। कोहरे से हवा में प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा के रोगियों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। शारीरिक क्षमता से कमजोर होने से बच्चे ज्यादा चपेट में आते हैं। रेसप्रेटरी संक्रमित रोगों से बच्चों के साथ बड़े भी प्रभावित होते हैं।
जीएमसी के पूर्व अधीक्षक डॉ. रोमेश गुप्ता ने बताया कि सर्द हवाओं के साथ दिन और रात के तापमान में सामान्य से ज्यादा गिरावट से बच्चों में हाइपोथर्मिया की समस्या रहती है। शरीर के भीतर एक तंत्र रहता है जो बाहर के मौसम के हिसाब से खुद ही शरीर के भीतर के तापमान को सही बनाए रखता है। लेकिन हाइपोथर्मिया में कमजोर बच्चे बाहर के तापमान को झेल नहीं पाते हैं, इससे भीतर का तापमान गड़बड़ा जाता है। शरीर के ठंडा होने से कई तरह की दिक्कतें आती हैं। इसकी चपेट में छह माह से कम आयु वर्ग के बच्चे ज्यादा आते हैं। बच्चों को एक्यूट ब्रोंकोलाइटस (सांस संबंधी) भी परेशान कर रहा है। इसमें सांस की नली में सूजन आ जाने के कारण पीड़ित बच्चा पूरी तरह से सामान्य रूप में सांस नहीं ले पाता है। पीड़ित की हालत निमोनिया की तरह हो जाती है। कोहरे से सांस और छाती संबंधी संक्रमित रोगों में इजाफा होता है। बारिश न होने पर यह दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
---बचाव
1. बच्चों को ठंड में नंगे पांव न घूमने दें
2. तापमान के हिसाब से पर्याप्त कपड़े पहने
3. रात में दोपहिया वाहन पर ड्राइविंग से परहेज करें
4. सर्द हवाओं में शरीर को पूरी तरह ढककर रखें