- 68 बूथों पर दिनभर रही वोटरों की भीड़, महिलाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
जम्मू/दोमाना। नगरोटा विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार को उपचुनाव के दाैरान वोटरों में जबरदस्त उत्साह रहा। महिलाओं, किसानों के साथ कश्मीरी पंडितों ने भी वोट डाले। भलवाल ब्लॉक के 68 बूथों पर सुबह से ही वोटरों की लंबी कतारें देखी गईं। सुबह नौ बजे तक लगभग दस प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था जो दोपहर एक बजे तक बढ़कर 60 प्रतिशत के पार पहुंच गया। शाम छह बजे तक मतदान का आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंचा। पूरे दिन मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
मतदान के दौरान कुछ बूथों पर पेयजल की कमी की शिकायतें जरूर सामने आईं लेकिन ग्रामीणों ने प्रशासन का सहयोग करते हुए पूरे उत्साह के साथ मतदान में भाग लिया। कई किसानों ने सुबह-सुबह वोट डालकर खेतों का रुख किया। इस बार ग्रामीणों में मतदान के प्रति काफी जागरूकता देखने को मिली। भलवाल प्रखंड के घरोटा और बरन गांव के बूथों पर सुबह से ही मतदाताओं की भीड़ उमड़ी रही। बरन गांव के दो बूथों पर सुबह 10 बजे तक महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा थी। भलवाल के अपर घरोटा स्कूल परिसर में बनाए गए बूथ नंबर 48 को ‘पिंक बूथ’ घोषित किया गया था, जहां सभी कर्मचारी महिलाएं थीं। मतदान केंद्रों पर बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर की भी व्यवस्था की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क रहा। सभी बूथों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। नगरोटा विधानसभा के तहत कुल मतदान प्रतिशत 74.61 रहा, जो उपचुनाव के लिए रिकॉर्ड माना जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में बढ़ी जागरूकता और शांतिपूर्ण वातावरण ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
बडगाम सीट के लिए विस्थापित
कश्मीरी पंडितों ने किया मतदान
नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दो बूथों पर बडगाम सीट के उपचुनाव के लिए विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय ने मतदान किया। जम्मू में रह रहे पंडितों के लिए हर चुनाव की तरह इस बार भी विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। नगरोटा के माइग्रेंट स्कूल और जगती कॉलोनी स्कूल में दो विशेष बूथ बनाए गए। जगती कॉलोनी में बने बूथ पर 70 मतदाताओं के नाम दर्ज थे, जबकि नगरोटा के माइग्रेंट स्कूल में 15 मतदाता सूचीबद्ध थे। जगती कॉलोनी बूथ पर बूथ प्रबंधन देख रही सुषमा पंडित ने बताया कि परिस्थितियों को देखते हुए वे अब भी कश्मीर जाकर वोट नहीं डाल पाते, इसलिए सरकार द्वारा जम्मू में ही मतदान की सुविधा दी गई है। सुषमा ने बताया कि समुदाय के लोग अपने मूल स्थान पर लौटने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन फिलहाल इस तरह की मतदान व्यवस्था उन्हें राजनीतिक रूप से जुड़े रहने का अवसर देती है।