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जम्मू में वायरस इंफेक्शन की जांच को नहीं बन पाए सक्षम, सैंपलों की जांच दूसरे राज्यों के सहारे

Fri, 07 Feb 2020 09:42 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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कोरोना वायरस
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जम्मू-कश्मीर संदिग्ध मरीजों के सैंपलों के टेस्ट के लिए अभी भी दूसरे राज्यों की लेबोरेटरी पर निर्भर है। प्रदेश से कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के सैंपलों को जांच के लिए नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) दिल्ली या नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे भेजे जा रहे हैं। 
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लेकिन पिछले पांच साल में जीएमसी में बायो सेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल-3, स्वाइन फ्लू) की लैब तैयार नहीं हो पाई है। इससे दूसरे राज्यों में भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट हफ्ते या इससे अधिक समय बाद मिलती है। अपनी लैब होती, तो सैंपलों की रिपोर्ट उसी दिन मिल सकती थी।  

जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2014 में रिकार्ड स्वाइन फ्लू के मामले आने के बाद सरकार ने जीएमसी जम्मू में 6.30 करोड़ और सीडी अस्पताल श्रीनगर में 5.635 करोड़ रुपये टेस्टिंग लैब बनाने के लिए मंजूर किए थे। लेकिन जीएमसी में अब तक लैब का काम पूरा नहीं हो पाया है। इससे विभिन्न प्रकार के वायरस इंफेक्शन के संदिग्ध मरीजों के सैंपलों को जांच के लिए दूसरे राज्यों की लैब में भेजना पड़ रहा है। इससे टेस्ट की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है। 
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यह सैंपल अधिकतर हवाई मार्ग से संबंधित लैब में भेजे जाते हैं। दूसरे राज्यों में सैंपल भेजने पर देरी से रिपोर्ट आने की सूरत में मरीज को भी एहतियातन कई दिनों तक अस्पताल या घर पर आइसोलेट रहना पड़ता है। इससे उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान होना पड़ता है।  

उम्मीद है जल्द लैब शुरू होगी : प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डा. सुनंदा रैना ने कहा कि स्वाइन फ्लू लैब के लिए पैसा मंजूर हो गया है। लैब के भीतर का काम पूरा कर लिया गया है और बाहर का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसमें अत्याधुनिक उपकरणों के लिए पैसा मंजूर हो गया है।
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