जम्मू-कश्मीर संदिग्ध मरीजों के सैंपलों के टेस्ट के लिए अभी भी दूसरे राज्यों की लेबोरेटरी पर निर्भर है। प्रदेश से कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के सैंपलों को जांच के लिए नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) दिल्ली या नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे भेजे जा रहे हैं।
लेकिन पिछले पांच साल में जीएमसी में बायो सेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल-3, स्वाइन फ्लू) की लैब तैयार नहीं हो पाई है। इससे दूसरे राज्यों में भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट हफ्ते या इससे अधिक समय बाद मिलती है। अपनी लैब होती, तो सैंपलों की रिपोर्ट उसी दिन मिल सकती थी।
जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2014 में रिकार्ड स्वाइन फ्लू के मामले आने के बाद सरकार ने जीएमसी जम्मू में 6.30 करोड़ और सीडी अस्पताल श्रीनगर में 5.635 करोड़ रुपये टेस्टिंग लैब बनाने के लिए मंजूर किए थे। लेकिन जीएमसी में अब तक लैब का काम पूरा नहीं हो पाया है। इससे विभिन्न प्रकार के वायरस इंफेक्शन के संदिग्ध मरीजों के सैंपलों को जांच के लिए दूसरे राज्यों की लैब में भेजना पड़ रहा है। इससे टेस्ट की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है।