रोहिंग्या तथा बांग्लादेशियों के खिलाफ भाजपा और विहिप लामबंद होने लगे हैं। विहिप ने इन्हें हटाने के लिए आंदोलन की चेतावनी दी है। विहिप के अध्यक्ष लीलाकरण शर्मा का कहना है कि सरकार को इनके बारे में विस्तृत छानबीन कर इन्हें शहर से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
यदि सरकार ने इसमें हीलाहवाली की तो आंदोलन किया जाएगा। लोगों को भी इस खतरे के प्रति जागरूक किया जाएगा। भाजपा भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा का कहना है कि विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। कोशिश होगी कि विधानसभा में सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर दिलाया जाए। इस बारे में एक स्पष्ट नीति बननी चाहिए।
हजारों किमी दूर आकर बसे हैं सैकड़ो परिवार
रोहिंग्या समुदाय की बढ़ती तादाद बनी खतरा
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रियासत में 2008 के बाद से रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी शरणार्थियों का आना अचानक तेज हो गया। जम्मू के विभिन्न इलाकों में रहने वाले इन लोगों का कहना है कि म्यांमार में जब उन पर जुल्म बढ़ा तो जान बचाने की खातिर वे भारत चले आए। रोजगार कमाने की नीयत से जम्मू में ठौर मिला। घर की याद तो सताती है, लेकिन फिलहान वापस लौटने का कोई इरादा नहीं।
नरवाल में रहने वाले मोहम्मद हारून ने बताया कि वह छह-सात साल पहले भारत आए। म्यांमार में उनके पिता और चाचा की हत्या कर दी गई। वे किसी तरह जान बचाकर भारत आए। कुछ दिनों तक दिल्ली रहे। फिर जम्मू चले आए। जम्मू के लोग काफी अच्छे हैं। कभी भी इन्होंने सताया नहीं। यहां काम की भी कमी नहीं है।
जाहिद का कहना है कि वह 2009 में यहां आया। पहले राजस्थान में रहा, लेकिन वहां फाकाकशी की नौबत आ गई। वहां काम करने वाले कुछ लोगों से जम्मू के बारे में पता चला तो वह परिवार के साथ यहां चले आए। म्यांमार के हालात इतने खराब हैं कि वहां लौटने के बारे में फिलहाल सोचा भी नहीं जा सकता।
यहां जब तक काम मिलेगा रहेंगे नहीं तो फिर कहीं और शरण ली जाएगी। मो. दानिश का कहना है कि वह 2012 से यहां रह रहा है। उसके कुछ परिचित पहले से रह रहे थे। इसकी जानकारी होने पर वह सीधे यहां चला आया। यहां सकून है।