वीडीजी बोले, इससे कैसे करेंगे आतंकियों की एम4 राइफल का मुकाबला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में तैनात विलेज डिफेंस गार्ड (वीडीजी) 25 वर्ष बाद भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक तरफ इन इलाकों में सक्रिय आतंकी अमेरिका की एम4 जैसी आधुनिक असाल्ट राइफल इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी तरफ वीडीजी के पास अब भी थ्री नाॅट थ्री राइफलें हैं। कुछेक को छह महीने पहले एसएलआर राइफलें जरूर मिलीं, लेकिन ये भी पुरानी हैं। इनकी मैगजीन में भी पूरी गोलियां नहीं दी जा रहीं। वीडीजी का कहना है कि ऐसे माहौल में आतंकियों का मुकाबला कैसे करेंगे।
अरनिया क्षेत्र के सीमावर्ती गांव कोटली जबोबाल के रहने वाले शमशेर सिंह वर्ष 2000 से वीडीजी हैं। इनके ग्रुप में पांच लोग हैं। शमशेर का कहना है कि अभी छह माह पहले उन्हें एसएलआर गन मिली है। इसकी मैगजीन में 20 गोलियां आती हैं, लेकिन हमें सिर्फ 15 ही दी गई हैं। आतंकियों का मुकाबला करना हो तो ये एक झटके में खत्म हो जाएंगी। कम से कम 50 गोलियां तो मिलनी चाहिए, क्योंकि आतंकी एक मिनट में सैकड़ों गोलियां दागने वाले हथियार इस्तेमाल करते हैं। हमारे पास उनके मुकाबले कम ताकत है। इसी ग्रुप के वीडीसी शाम लाल का कहना है कि उनके पास अब भी थ्री नाॅट थ्री गन ही है। वीडीजी सेल के भाजपा कन्वीनर बसंत राज ठाकुर का कहना है कि सभी वीडीजी को स्वचालित हथियार उपलब्ध कराए जाएं।
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मानदेय कम, वह भी वक्त पर नहीं मिलता
उधमपुर क्षेत्र के वीडीजी राज कुमार का कहना है कि हमारा मानदेय चार हजार रुपये है। जबकि वे पुलिस चौकियों में पुलिसकर्मियों के बराबर ड्यूटी देते हैं। बावजूद इसके मानदेय बहुत कम है और वह भी समय पर नहीं मिलता मानदेय 10 से 15 हजार रुपये होना चाहिए। राजोरी के वीडीजी पंजाब सिंह का कहना है कि मानदेय बढ़ाने के लिए कई बार उच्च स्तर तक बात पहुंचाई है। लेकिन हुआ कुछ नहीं।
चार हजार से अधिक समूह
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 4100 वीडीजी समूह हैं। किसी समूह में पांच तो कहीं तीन लोग हैं। इन समूहों में लगभग 500 लोगों को ही अब तक एसएलआर राइफलें दी गई हैं। बाकी अब भी थ्री नाॅट थ्री ही इस्तेमाल कर रहे हैं।