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Jammu News: वाल्व टैंकों में गंदगी के कारण घरों में पहुंच रहा दूषित पानी, अस्पतालों में बढ़े मरीज

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पेयजल सप्लाई के वाले वाल्व में जमा गंदगी। सौ.स्थानीय नागरिक
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जम्मू। नगर निगम के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी अब जनता के लिए अमृत नहीं बल्कि जहर साबित हो रहा है। मुख्य वाल्व टैंकों की लंबे समय से सफाई न होने के कारण इनमें गंदगी का अंबार लगा है और कीड़े बजबजा रहे हैं। पानी की सप्लाई का प्रेशर कम होते ही कीड़े बैक-प्रेशर के कारण मुख्य पाइपलाइन में समा जाते हैं और अगली सप्लाई के साथ सीधे घरों तक पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि नलों से आने वाले पानी में काले और सफेद कीड़े साफ देखे जा सकते हैं।
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मानसून के दस्तक देते ही उमस और जलभराव के कारण बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनप रहे हैं। इस दूषित पानी के इस्तेमाल से कई मोहल्लों में बच्चे और बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) और जिला अस्पतालों की ओपीडी में कुछ दिन से पेट दर्द, उल्टी-दस्त और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। शहर के पंपिंग स्टेशनों और स्टोरेज टैंकों में सिल्ट की मोटी परत बैठ चुकी है। लोगों का आरोप है कि हेल्पलाइन नंबर पर कई बार शिकायतें दी गईं लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

जर्जर पाइपलाइन और लीकेज बढ़ा रहे है परेशानी
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार कई इलाकों में बिछी भूमिगत पाइपलाइन पुरानी और जर्जर हो चुकी है। मानसून के दौरान जब सड़कों और नालियों में गंदा पानी भर जाता है तो लीकेज वाले स्थानों से वह सीधे मुख्य सप्लाई लाइन में मिक्स हो जाता है। यही दूषित पानी बीमारियों का कारण बन रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जल शक्ति विभाग को सभी लीकेज ठीक करने के निर्देश जारी किए हैं।
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मरम्मत के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट
एक तरफ जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ जल शक्ति विभाग के अधिकारी ठेकेदारों को वर्क अलॉट कर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान कर रहे हैं। कागजों में काम दिखाने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिख रहा है। साउथ और नॉर्थ जोन में चार ठेकेदारों की फर्मों को ट्यूबवेल की मोटर ठीक करने और पाइपलाइन की लीकेज बंद करने के नाम पर बड़ा भुगतान किया गया है। मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने को खपाने का खेल जनता के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।
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