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Vaishno Devi: वैष्णो देवी 'नकली चांदी' मामले में कोर्ट सख्त, जांच रिपोर्ट और सबूत सुरक्षित रखने के दिए निर्देश

Tue, 04 Aug 2026 03:58 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू कोर्ट ने माता वैष्णो देवी श्राइन से जुड़े 500 करोड़ के नकली चांदी मामले में जांच रिपोर्ट तलब करते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
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वैष्णो देवी - फोटो : Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board
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विस्तार
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माता वैष्णो देवी श्राइन से जुड़े 500 करोड़ के नकली चांदी मामले में जम्मू की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) जम्मू मुनिश कुमार मनहास ने मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है और संबंधित अधिकारियों को सबूत सुरक्षित रखने के आवेदन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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अदालत ने यह आदेश अधिवक्ता दीपक शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 29 जुलाई को दिया। याचिका में मामले से जुड़े दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी।

20 टन चांदी की पेशकश में मिलावट का आरोप
अधिवक्ता दीपक शर्मा ने इससे पहले 9 मई को जम्मू क्राइम ब्रांच के आईजी और आर्थिक अपराध शाखा के एसएसपी को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि श्रद्धालुओं की ओर से माता वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाई गई करीब 20 टन चांदी की पेशकश में मिलावट, अदला-बदली, चोरी और गबन की संभावना है। शिकायतकर्ता ने इन चांदी की पेशकशों की कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई थी।

सबूत सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में मांग की गई थी कि बची हुई चांदी या कथित चांदी की वस्तुओं, नमूनों, अवशेषों, स्टॉक रिकॉर्ड, तौल और डिस्पैच रजिस्टर, लैब रिपोर्ट, परिवहन दस्तावेज और सामग्री की पूरी कस्टडी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए।

इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक इन्वेंटरी डेटा, ईमेल रिकॉर्ड, सर्वर लॉग, एक्सेस रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि यदि सामग्री को पिघलाया, स्थानांतरित या दोबारा प्रोसेस किया गया अथवा डिजिटल रिकॉर्ड को हटाया गया तो साक्ष्यों की पहचान, गुणवत्ता, वजन और पूरी प्रक्रिया की जांच प्रभावित हो सकती है।

डीएसपी भवन से मांगी गई रिपोर्ट
अदालत ने माता वैष्णो देवी भवन के डीएसपी को निर्देश दिए हैं कि याचिका में उठाए गए तथ्यों पर उचित कार्रवाई करें और 18 अगस्त को अगली सुनवाई के दौरान चल रही जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।

क्राइम ब्रांच की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, शिकायत 11 मई को प्राप्त हुई थी और आगे की कार्रवाई के लिए 20 मई को क्राइम मुख्यालय भेजी गई थी। इसके बाद मामला जम्मू जोन पुलिस मुख्यालय और फिर एसएसपी रियासी को भेजा गया, जहां से जांच की जिम्मेदारी डीएसपी भवन, कटड़ा को सौंपी गई।
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एफआईआर दर्ज नहीं होने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने क्राइम ब्रांच की कार्रवाई रिपोर्ट को भी अदालत में चुनौती दी है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में न तो एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी गई है और न ही मामले में किसी ठोस जांच का उल्लेख है।

अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अदालत के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि अब जांच और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में आ गई है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी भौतिक, दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बदला या हटाया न जा सके।
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