"अब बात ना हो पाई, ऐ माई! ऊपर जात बानी...। चार दिन पहले बबुआ इहे कहले रहलन। हमरा का पता रहे कि ऊ ऐतना दूर जाए के बात करत रहलन।" चार दिन पहले बेटे लांस नायक राजेश यादव से बात करने वाली मां सोमरिया देवी ये बातें करते हुए आज भी फफक कर रो पड़ती हैं। यह बात 18 सितम्बर 2016 को शहीद होने से चार दिन पहले फोन पर बात करते हुए लांस नायक राजेश यादव ने अपनी मां से कही थी। वह साल 2016 में जम्मू-कश्मीर में हुए उरी हमले में शहीद हुए थे। अमर उजाला प्रसार क्षेत्र में रहने वाले उरी शहीदों के परिजनों को सम्मानित करने और उनके साथ बने रहने के समर्पण को प्रकट करने के लिए लखनऊ में एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जय हिंद, जय हिंद की सेना!
बलिया के दुबहर थाना क्षेत्र के दुबहर यादव डेरा गांव निवासी लांस नायक राजेश कुमार यादव की घरवालों से आखिरी बार शहीद होने से चार दिन पहले फोन पर बात हुई थी। 19 सितम्बर 2016 को जैसे ही पुलिस ने शहीद लांस नायक राजेश कुमार यादव के परिवार के लोगों को सूचना दी, उनका कलेजा हिल गया था। घर में कोहराम न मचे इसके लिए परिवार के पुरुष सदस्य थाने पर ही आ गए थे। वहीं इस खबर से पूरा गांव हतप्रभ रह गया था। हर किसी की आंखें अपने बहादुर बेटे के अंतिम दर्शन के इंतजार में लग गई थी। हालांकि विशेष विमान के बाबतपुर देर से पहुंचने की वजह से राजेश का पार्थिव शरीर 21 सितम्बर को गांव पहुंचाया गया था।
परिवार के अनुसार, बिहार रेजीमेंट में तैनात लांस नायक राजेश कुमार यादव जम्मू-कश्मीर में करीब पांच साल से तैनात थे। शहीद होने के करीब 20 दिन पहले ही वह छुट्टी पर गांव आए थे। गांव से लौटने के बाद उन्हें सूचना मिली कि उन्हें जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में जाना है। जिसके बाद उन्होंने अपनी मां सोमरिया देवी को फोन कर करीब एक घंटे तक बातचीत की थी। मां को सांत्वना दे रहा है कि उरी सेक्टर में जाने के बाद कम ही बात हो सकेगी। उसे क्या मालूम था कि उसकी यह अंतिम बात मां से हो रही है।
जिस वक्त राजेश शहीद हुए उस वक्त उनकी पत्नी गर्भवती थीं। दिल की मरीज तथा गर्भवती पत्नी से परिवार के सदस्यों ने करीब दो -तीन घंटे तक इस खबर को छिपाया। लेकिन इतना बड़ा दर्द देर तक लोगों के कलेजे और आंखें रोक नहीं पाईं। घर की महिलाओं को जैसे ही अपने परिवार के लाडले के शहीद होने की सूचना मिली। महिलाओं के रुदन-क्रंदन को सुनकर हर कोई रो पड़ा। गांव का हर शख्स राजेश के घर उनके दर्द में शरीक होने पहुंच रहा था। सभी की आंखों में अपने जाबांज बेटे की शहादत पर आंसू तो थे लेकिन गर्व से सीना भी चौड़ा हो गया था।