कश्मीर में मानवाधिकार हनन तथा नागरिकों की मौत पर बुधवार को विधानसभा तथा विधान परिषद में भारी हंगामा हुआ। सरकार की ओर से इस मुद्दे पर चर्चा न करवाए जाने से नाराज विपक्षी सदस्यों नेकां और कांग्रेस ने दोनों सदनों का बहिष्कार किया।
इस कारण विधान परिषद की कार्यवाही करीब पांच मिनट तक रोकनी पड़ी। दरअसल विपक्ष की ओर से दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगन प्रस्ताव लाया गया था, जिसे पीठासीन अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
विधानसभा में सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई तो विपक्ष ने प्रश्नकाल स्थगित कर कश्मीर में मानवाधिकार हनन व नागरिकों की मौत पर चर्चा करवाने की मांग की। इस पर अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए प्रश्नकाल के बाद चर्चा कराने को कहा।
इससे विपक्षी सदस्य नाराज हो गए और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। कई बार वेल तक पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा लगातार अध्यक्ष से चर्चा कराने की मांग करते रहे। नेकां के अली मोहम्मद सागर, कांग्रेस के जीएम सरूरी सहित अन्य विपक्षी विधायक नारेबाजी करते रहे।
विपक्ष का कहना था कि कश्मीर के हालात पर चर्चा करवाना प्रश्नकाल से भी अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कराने से भाग रही है। इस बीच जब हंगामा काफी बढ़ गया तो अध्यक्ष को अपने आसन पर खड़ा होना पड़ा। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर गए।
अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि वह इस मुद्दे पर एक घंटे की बहस करवाएंगे। चर्चा में शामिल होने वाले अपना नाम दे दें। हालांकि थोड़ी ही देर बाद विपक्ष ने फिर चर्चा करवानेे के लिए हंगामा शुरू कर दिया। नेकां विधायक अल्ताफ कल्लू ने कागज फाड़कर सदन में फेंककर गुस्से का इजहार किया। इसके बाद चर्चा नहीं करवाने पर नेकां-कांग्रेस के सदस्य बहिष्कार कर बाहर चले गए।