विधान परिषद में कश्मीर में आठ जुलाई के बाद खराब रहे हालात पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों में जमकर नोंक-झाेंक हुई। एक-दूसरे को हालात के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। यहां तक कि वर्तमान और पूर्ववर्ती केंद्र व राज्य सरकारों को भी बहस के लपेटे में लिया गया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते हुए विपक्ष के मसले पर चर्चा करवाने के लिए हंगामे के बाद सदन के नेता नईम अख्तर ने सरकार की तरफ से चर्चा करवाने की अनुमति दी। इसके बाद नेकां के डा. बशीर अहमद वीरी ने कहा कि कश्मीर में नौजवानों का कत्ल हुआ। सरकार के स्थिति को संभालने में नाकाम रहने की वजह से 1990 जैसे हालात पैदा हुए।
पीडीपी कहती थी गोली से नहीं बोली से बात बनेगी, लेकिन अब उसकी जुबान कहां गई। गुजरात में सांप्रदायिक दंगे करवाने वालों से हाथ मिलाया हुआ है। कांग्रेस के गुलाम नबी मोंगा ने कहा कि बुरहान वानी की मौत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा गृह मंत्री को एनकाउंटर की पूरी जानकारी थी। रियासत में गृहमंत्री मुख्यमंत्री महबूबा ही है।
महबूबा का बयान आया कि बुरहान का पता होता तो उसको एक मौका और मिलता। प्रेस तक पर बैन लगाया गया। सैन्य शिविरों, पुलिस स्टेशनों पर हमले हुए और स्कूल जलाए गए।
मशीनरी का ब्रेक डाउन रहा। आतंकवादी मरता था तो महबूबा रोने जाती थी, अब बेगुनाह मरे तो यह लोग कहां गए। पीडीपी के जफर इकबाल मन्हास ने कहा कश्मीर में जो हुआ, वह अचानक नहीं हुआ। पिछले सात दशक से लोगों की नाराजगी का कारण है। कहा पंडित नेहरू और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला गलती न करते तो आज कश्मीर मसला भी नहीं होता।
भाजपा के विबोध गुप्ता ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय किया। नेकां के शेख मोहम्मद अब्दुल्ला से उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री को बेहद प्यार था, इसलिए पाकिस्तान को हराने के बावजूद मीरपुर, कोटली, मुजफ्फराबाद को वापस नहीं लिया गया। इसका कारण यह था कि शेख अब्दुल्ला को लगता था कि यह इलाके वापस आने से उनकी कुर्सी को खतरा रहेगा।
उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को अगर कश्मीर में लोगों के मरने का गम होता तो वह जम्मू में आकर नाचते नहीं। नेकां के कैसर जमशेद लोन ने भी पीडीपी-भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस के जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि पीडीपी-भाजपा सरकार समस्या का कारण है। भाजपा अब बताए 370 कहां गया। एक विधान एक निशान कहां गया। सत्ता के लिए यह लोग सब भूल गए।