शहर में लोगों के लापता होने को लेकर यहां पुलिस तो चिंतित है ही दूसरी तरफ रणवीर नहर में आए दिन मिल रहे शव किसानों के लिए भी सिरदर्दी बन गए हैं। लापता लोगों को ढूंढने के लिए पुलिस को नहरें बंद करवानी पड़ती हैं और नहर के बंद होने पर किसान परेशान हो जाते हैं, जिन्हें पानी नहीं मिलता।
इस समय धान की पनीरी लगाई गई है, जिसे पानी की जरूरत है। इसके अलावा कई इलाकों में पनीरी बड़ी हो चुकी है। धान की बिजाई करने के लिए खेतों में पानी की भी आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार रणवीर नहर को अखनूर से लेकर सीमांत इलाकों के कई जगहों तक बंद करना पड़ रहा है।
पिछले दो हफ्तों में रणवीर नहर को अखनूर रोड पर पांच बार बंद किया जा चुका है। इसके अलावा सतवारी के दड़प इलाके में भी दो बार नहर बंद की गई। इसके अलावा आरएस पुरा, बिश्नाह क्षेत्र में भी पांच बार नहर बंद की जा चुकी है। किसानों का कहना है कि आए दिन नहर बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान ग्रोवर्स एसोसिएशन के प्रधान चौधरी देव राज का कहना है कि सीमांत इलाकों में अब भी बरी सिस्टम से पानी मिलता है। नहर बंद होने के दौरान कई किसानों की बारी रहती है, जब पानी बंद हो तो किसान खेतों में पानी नहीं लगा पाते। जब खेतों में पानी छोड़ा जाता है, तो बारी का वक्त निकल चुका होता है।
इसकी वजह से किसानों को पानी नहीं मिल पाता। उल्लेखनीय है कि पिछले दस दिनों के भीतर रणवीर नहरे से 15 से अधिक शव मिल चुके हैं। अकेले दोमाना क्षेत्र में ही पांच शव मिल चुके हैं।