बिश्नाह अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट नियमों के उल्लंघन से खलबली
संवाद न्यूज एजेंसी
बिश्नाह। स्थानीय अस्पताल परिसर के सामने आए बायोमेडिकल वेस्ट उल्लंघन के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अस्पताल के कबाड़ के ढेर में एक्सपायरी दवाओं के साथ-साथ अनएक्सपायरी दवाइयां और इस्तेमाल की गई सिरिंज-सुइयां भी पाई गई हैं। इससे खलबली मच गई है।
बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों के अनुसार, इस्तेमाल के बाद सिरिंज की सुई को विशेष बॉक्स में तोड़ा जाता है और बॉक्स भरने के बाद ही बायोमेडिकल वेस्ट में भेजा जाता है। लेकिन बिश्नाह अस्पताल में रोजाना स्तर पर सैकड़ों मरीजों की जांच के बाद इस्तेमाल हुई सुइयों को सीधे कबाड़ में फेंका जा रहा है, जो लोगों की जान को खतरे में डालने जैसा है।
अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर तब और सवालिया निशान लगा जब अनएक्सपायरी दवाइयां भी बायोमेडिकल वेस्ट में पाई गईं। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक्सपायरी दवाओं का उचित निपटान न होना पर्यावरण प्रदूषण और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में महामारी फैलने का भी खतरा बना रहता है। बीएमओ का कहना है कि यदि नियम उल्लंघन के सबूत मिलते हैं, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बीएमओ ने बताया साजिश, जांच कमेटी का गठन
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) बिश्नाह श्याम लाल ने इस मामले को अस्पताल को बदनाम करने की साजिश करार दिया। उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर के अंदर से ही किसी ने प्री-प्लांनड होकर यह काम किया है, जिसकी पहचान की जा रही है। बीएमओ ने कहा कि इस संदर्भ में जल्द ही एक जांच कमेटी का गठन किया जाएगा ताकि साजिश का पर्दाफाश किया जा सके। बीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि बायोमेडिकल वेस्ट उठाने का करार अनमोल संस्था के साथ है जो हफ्ते में 2 दिन अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट उठाकर ले जाती है। एक्सपायरी दवाइयों का स्टॉक बंद कमरे में रखा जाता है और अनमोल की गाड़ी आने के बाद कमरा खोलकर उसमें दवाइयां रख दी जाती हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का सख्त रवैया
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) जम्मू नरेंद्र भूतियाल ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि बीएमओ की नाक के नीचे ऐसा कार्य होना निंदनीय है और जल्द ही मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन के मानक
-बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम 2016 के तहत स्वास्थ्य संस्थानों को सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इन नियमों के अनुसार इस्तेमाल की गई सुइयों को पंचर-रेजिस्टेंट कंटेनर में रखा जाना चाहिए।
-एक्सपायरी दवाओं को विशेष प्रक्रिया से निपटाना चाहिए।
-बायोमेडिकल वेस्ट को अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही निपटाना चाहिए।
-नियमित ऑडिट और स्टॉक चेकिंग अनिवार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं के स्टॉक प्रबंधन और निपटान प्रक्रिया में सुधार की सख्त जरूरत है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।