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Ukraine Crisis: घर पहुंचते ही छलके माता-पिता के आंसू, छात्रों ने बताया-चार दिन पैदल चलकर किया हंगरी बॉर्डर पार

Fri, 04 Mar 2022 02:57 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे जम्मू-कश्मीर के 130 विद्यार्थियों व परिवारों में से अब तक 30 विद्यार्थी सकुशल लौट आए हैं। इनमें नौ जम्मू और 21 कश्मीर संभाग के हैं।
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यूक्रेन से लौटी मानवी परिजनों के साथ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जम्मू जिले के जयौड़ियां वार्ड दो निवासी जानवी शर्मा यूक्रेन से घर पहुंच गई। वह यूक्रेन के खारकीव क्षेत्र में एमबीबीएस की एमबीबीएस दूसरे वर्ष की छात्रा हैं। जानवी जब अपने घर पहुंचीं तो उनके परिजनों व जानवी के चेहरे पर खुशी की लहर थी। जानवी जब परिजनों से मिलीं तो बिलखते हुए कहा मैं बहुत ही मुश्किल से पहुंची हूं। जानवी दूसरे वर्ष की पढ़ाई के दौरान एक दफा घर आई थीं। बताया कि यूक्रेन से हंगरी तक हमें अपनी सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। हंगरी से आगे पूरी मदद मिली है। जानवी ने बताया अभी भी लगभग चार हजार भारतीय छात्र खारकीव में फंसे हैं। जानवी ने बताया छात्र अपने बलबूते पर निकल रहे हैं। जानवी ने बताया कि वह 24 जनवरी को खारकीव से निकली थीं और चार दिन लग गए कीव तक पहुंचने में। अधिकतर सफर पैदल तय किया। बताया कि आठ दिन से उसने खाना नहीं खाया है।

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Ukraine student from Jammu - फोटो : संवाद

मानवी गुप्ता ने कहा, रोमानिया बॉर्डर पर दो बार गेट से पीछे धकेली गई

बाड़ी ब्राह्मणा की मानवी गुप्ता यूक्रेन से घर पहुंची। उनके घर पहुंचते ही परिजनों ने राहत की सांस ली। भरी आंखों से मानवी ने बताया कि अभी 3 महीने पहले ही यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई करने गई थी। पढ़ाई अच्छे तरीके से चल रही थी, लेकिन रूस और यूक्रेन के हालात बिगड़ते ही परेशानी बढ़ने लगी। यूनिवर्सिटी की तरफ से बताया गया था कि सबकुछ ठीक ही रहेगा। मगर जब धमाकों की आवाज उन तक पहुंचने लगी तो वह घबरा गए और उन्होंने यूनिवर्सिटी से घर वापस जाने के लिए कह दिया। 

Ukraine student from Jammu - फोटो : संवाद

23 फरवरी को वहां से निकलना शुरू किया

उन्होंने बताया कि वह यूनिवर्सिटी से बस से निकले। इसके बाद पैदल रोमानिया बार्डर के लिए निकल पड़े। बताया कि भारत सरकार से जारी एडवाइजरी के अनुसार ही आगे चलते रहे। आखिरकार रोमानिया बार्डर तक पहुंच गए। रोमानिया बार्डर पर पहुंचते ही हालात बहुत बदतर थे। वहां हजारों की संख्या में लोग थे। बार्डर पार करने में जद्दोजहद की। उन्होंने बताया कि वह रोमानिया बार्डर के गेट पर दो बार पहुंची, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण पीछे धकेल दी गई। तीसरी कोशिश में उनको 8 घंटे लग गए। उन्होंने बताया कि सात दिन ऐसा भयानक मंजर देखने को मिला कि कई बार लगा हम घर नहीं पहुंच पाएंगे। 

Ukraine student - फोटो : एएनआई

युद्ध छिड़ने से पहले छात्र पहुंचा वतन

कस्बा की मंडी संगवाली निवासी बित पाल सिंह का बेटा पूरव सिंह यूक्रेन में शुरू हुए युद्ध से पहले ही अपने वतन लौट आया। पूरव सिंह के पिता बित पाल ने बताया कि उनका बेटा 2019 में यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था। जैसे ही युद्ध की बातें चलने लगी तो हमने बेटे को हवाई जहाज की टिकट भेजी। वह शीघ्र ही वतन लौट आया। 24 फरवरी को अपने देश में था। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन का बेटा अपने वतन लौटा उन्हें राहत मिली। 
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Ukraine student - फोटो : ANI

तंजील के सकुशल लौटने की दुआएं कर रहे माता-पिता

जम्मू निवासी सलीमा गोहर की बेटी तंजील गोहर यूक्रेन में एमबीबीएस की दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। लेकिन वर्तमान में युद्धक्षेत्र में फंसी हुई है। सलीमा ने बताया कि बुधवार को उसके यूक्रेन शहर से रेल माध्यम से निकलने की सूचना मिली है, जिसमें वह किसी बॉर्डर पर पहुंचकर हवाई मार्ग से भारत आएगी। हम यही दुआएं कर रहे हैं कि वह जल्द से जल्द हमारे पास पहुंच जाए। यूक्रेन में रूस हमले से हजारों भारतीय बच्चों की एमबीबीएस पढ़ाई प्रभावित हुई है।
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