जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारतीय सेना के जांबाज जवानों के साथ-साथ खोजी कुत्तों की भूमिका हमेशा से बेहद अहम रही है।किश्तवाड़ में ऑपरेशन के दौरान टायसन की भूमिका अहम रही। आतंकियों के ठिकाने का सटीक पता इसी बहादुर श्वान ने लगाया था और मुठभेड़ शुरू होते ही आतंकियों की पहली गोली भी टायसन ने ही खाई।
किश्तवाड़ के छात्रू में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में पहला मौका नहीं है जब सेना के इन मूक प्रहरियों ने ऑपरेशनों में अपनी जान पर खेलकर जवानों की मदद की है। सेना के श्वानों ने देश के लिए पहले भी अपना खून बहाया है।