प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 250 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जम्मू-कश्मीर को-आपरेटिव बैंक के पूर्व चैयरमेन मोहम्मद शफी डार समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दूसरे शख्स की शिनाख्त फर्जी फर्म रिवर झेलम को-ऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के अध्यक्ष मोहम्मद हिलाल ए मीर के रूप में हुई है।
इससे पहले ईडी ने वीरवार को डार के आवास सहित 26 जगहों पर ईडी ने छापे मार कर आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में धोखाधड़ी फर्जी संस्था रिवर झेलम कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के नाम पर की गई थी।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एजेंसी को तलाशी और जब्ती के लिए श्रीनगर में ईडी ने छापे भी मारे थे। अगस्त 2020 में जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए मीर, डार और अन्य के खिलाफ मामले में आरोप पत्र दायर किया था।
मीर ने को-ऑपरेटिव समितियों के प्रशासन विभाग के सचिव सहकारी समितियों को एक आवेदन दिया था, जिसमें श्रीनगर के बाहरी इलाके में 37.5 एकड़ भूमि का कब्जा लेने के लिए 300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने के लिए जम्मू-कश्मीर को-ऑपरेटिव बैंक को निर्देश देने की मांग की गई थी।
जम्मू-कश्मीर को-ऑपरेटिव बैंक के साथ सहयोग के लिए आवेदन को को-ऑपरेटिव समितियों, जम्मू और कश्मीर के रजिस्ट्रार को अनुमोदित किया गया था। एसीबी ने जांच में पाया कि श्रीनगर में जेएंडके को-ऑपरेटिव बैंक ने किसी भी औपचारिकताओं का पालन किए बिना 223 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया।
अब तक 187 करोड़ रुपये की राशि जब्त
जांच से पता चला कि रिवर झेलम कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी को को-ऑपरेटिव समितियों के रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत भी नहीं किया गया था। मीर ने डार और अन्य के साथ मिलकर सोसायटी के नाम पर एक फर्जी और काल्पनिक पंजीकरण प्रमाण पत्र तैयार किया था और ऋण की मंजूरी का प्रबंधन किया था।
यह पाया गया कि ऋण राशि भूमि मालिकों के खातों में वितरित की गई थी, लेकिन भूमि बैंक के पास गिरवी नहीं रखी गई थी। इसके अलावा एसीबी द्वारा की गई जांच 223 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा करने में सफल रही अधिकारियों ने बताया कि ब्यूरो ने अब तक 187 करोड़ रुपये की राशि भी जब्त कर ली है।