बुरहान के मारे जाने के बाद 9 जुलाई 2016 -
1. मेरे शब्दों पर निशान लगा लें। आतंकवाद में नई भर्ती के मामले में बुरहान जितना सोशल मीडिया में सक्रिय रहते कर सकता था उससे कहीं ज्यादा वो कब्र में रहकर करने में सक्षम होगा।
2. कई वर्षों बाद मैने श्रीनगर की मस्जिदों से आजादी के नारे सुने हैं। कश्मीर के एक वर्ग को बीते दिन नया आइकन मिल गया।
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नायकू के ढेर होने पर 6 मई 2020 का ट्वीट
हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नायकू की मौत के बहाने हिंसा नहीं होनी चाहिए। नायकू की नियति तो उसी दिन तय हो गई थी जब उसने बंदूक उठा कर आतंक का रास्ता अपना लिया था।
हिंसा की किसी घटना को भड़काने के लिए इस घटना का उपयोग नहीं होना चाहिए। एजेंसी