Omar Abdullah and Mehbooba Mufti
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के आतंकी के घर जाने के मामले में सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और महबूबा के बीच ट्विटर वार भी हुआ।
उमर ने तंज कसते हुए कहा है कि बुरी तरीके से खराब हो चुकी छवि को अब वह साफ करने की कोशिश कर रही हैं। आपरेशन आल आउट की वह आर्किटेक्ट रही हैं। इसके चलते 2015 से अब तक सैकडों आतंकी मारे जा चुके हैं। अब वह एक आतंकी से दूसरे के घर जाकर अपनी दागदार छवि को सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
ट्वीट किया कि उन्होंने भाजपा को खुश करने के लिए आतंकियों की मौत को मंजूरी दी। अब वह मारे जा चुके आतंकियों का इस्तेमाल कर मतदाताओं को खुश करने में जुटी हैं। जनता को वह इतनी आसानी से धोखा खाने वाला कैसे समझ सकती हैं।
इस पर महबूबा ने जवाबी टवीट कर याद दिलाया कि 1996 से 2002 तक नेकां के शासनकाल में इख्वानों के जरिये खूनी खेल खेला गया। पीडीपी अपने लोगों तक पहुंच बनाने में विश्वास करती है। पीडीपी यह जानना चाहती है कि वह महबूबा मुफ्ती को अपमानित करना चाहते हैं या फिर नेकां की राजनीति है कि मासूमों का खून बहता रहे।
इस पर उमर ने फिर ट्वीट किया कि बॉस, यदि आप अपने एक्शन को लेकर पाखंड में जीना चाहती है तो मैं अपमानित करने वाला कौन हूं। वह क्या दूध या टाफी लेने गए थे, यह क्या उनके आउटरिच का हिस्सा है।
फिर महबूबा ने ट्वीट किया कि मेरा इन परिवारों के यहां जाना आपके लिए परेशानी पैदा नहीं करेगा। हमें चाहिए कि उन तक पहुंचा जाए क्योंकि उन्हें दूसरे की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता है।
भाजपा ने कहा, यह राजनीतिक नौटंकी
भाजपा नेता अशोक कौल ने कहा कि यह राजनीतिक नौटंकी है। 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा के दौरान कई लोगों के मारे जाने पर उन्होंने कहा था कि क्या वे टाफी या दूध लेने गए थे।