- सामाजिक संस्था ने किया प्रेरित, चार-चार महिलाओं के बनाए 16 ग्रुप
- कारोबार से जुड़ी हैं 64 महिलाएं, हल्दी की खेती कर पाल रही परिवार
प्रीत चौधरी
सांबा। गांव बैन गलाड की भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से 200 मीटर दूर हल्दी की खेती कर राधिका रानी ने एक मिसाल कायम की है। जिले की भारत पाक सीमा के साथ स्टे गांव बैन गलाड में पाक रेंजर की ओर से अकारण गोलीबारी कर ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया जाता था। केंद्र सरकार के प्रयास पर दोनों देशों के मध्य संघर्ष विराम की घोषणा हुई व सीमा पर बंदूकें शांत हुई।
स्थानीय लोगों के पुराने दिन लौटने लगे। इसमें जीरो लाइन के 200 मीटर दूर एक महिला किसान राधिका रानी ने हल्दी की खेती कर मिसाल कायम की है। राधिका रानी ने कहा कि तीन वर्ष पूर्व उन्हें एक सामाजिक संस्था सहारा जागृति मंच के सदस्यों ने उन्हें हल्दी की खेती करने के लिए जागरूक किया। उन्होंने अपने क्षेत्र में चार-चार महिलाओं के 16 ग्रुप बनाए व प्रत्येक महिला को एक-एक क्विंटल हल्दी का बीज दिया गया। उन्होंने बीज बो दिए। बाद में सरकार की ओर से 50 हजार ऋण भी दिया गया। इस कारोबार में 64 महिलाएं उनके साथ जुड़ी हुई हैं, जो हल्दी की खेती कर अपना परिवार पाल रही हैं।
पहले एक किसान ने अपने घर में ही थोड़ी सी हल्दी की खेती की थी। इसके बाद उन्हें लगा कि उन्हें भी लगानी चाहिए। इसी बीच एक सामाजिक संस्था ने उन्हें हल्दी के बारे में कहा तो उन्हें अच्छा लगा। गत तीन वर्ष से वह हल्दी की खेती करने में जुटी है।
राधिका
हल्दी की खेती अप्रैल माह से शुरू की जाती है, जो आठ माह में तैयार हो जाती है व फरवरी मार्च में हल्दी को निकाल लिया जाता है। जहां हल्दी की खेती होती है, वहां पर अन्य सब्जी भी तैयार की जा सकती है। किसानों को दोहरा लाभ मिल सकता है।
एक कनाल में एक क्विंटल हल्दी का बीज लगाया जाता है। जबकि सात माह बाद एक कनाल से चार क्विंटल की पैदावार होती है। ऐसे में किसान को खर्चा निकाल कर 30 से 40 हजार तक मुनाफा हो जाता है। यह उत्तम क्वालिटी का बीज होता है, जिसे ब्लैक टरमरिक कहते हैं।
विभाग ने आगामी वर्ष के लिए हल्दी के बीज के लिए योजना बनाई है। गत वर्ष भी किसानों को हल्दी की खेती करने के लिए जागरूक किया था। अब किसानों को हल्दी की खेती करने के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि उन्हें अच्छी आय हो सके।
स. मदन गोपाल सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी सांबा।