जम्मू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा।
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एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं, किसने जलाई बस्तियां बाजार क्यों लुटे, मैं चांद पर गया था मुझे कुछ पता नहीं। बशीर बद्र के शेर इन पंक्तियों के माध्यम से उपराज्यपाल ने जनजातीय समुदाय के लोगों के मामलों को उठाया। वह कला केंद्र जम्मू में जनजातीय विभाग की ओर से आयोजित जनजाति गौरव दिवस सप्ताह के उद्घाटन मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने उक्त शेर का हवाला देकर कहा कि ठीक ऐसी ही हालत देश और प्रदेश के जनजातीय समुदाय के लोगों की रही है। देश की स्वतंत्रता में इन लोगों के योगदान और कुर्बानी का जो हक मिलना था, वो नहीं मिल सका है, लेकिन मोदी सरकार समुदाय के लोगों के साथ हर तरह का भेदभाव खत्म करेगी।
जनजातीय समुदाय की जीवनी, उनकी संस्कृति के बारे में बताया
इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं, बेशक यह अभी पर्याप्त नहीं हैं, लेकिन आने वाले समय में इसका नतीजा सबको देखने को मिलेगा। सोमवार को स्वतंत्रता सैनानी जनजातीय समुदाय के डॉ. बिरसा मुंडा के जन्म दिवस पर राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस मनाया गया। कला केंद्र जम्मू में जनजातीय विभाग की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक प्रदर्शनी भी लगाई है, जिसमें जनजातीय समुदाय की जीवनी, उनकी संस्कृति, खान-पान, पहनावे, रहने आदि के बारे में बताया गया है।
सरकार ने समुदाय के लोगों को आरक्षण दिया
अगले एक हफ्ते तक यह कार्यक्रम चलेगा। जिसके तहत कई तरह की गतिविधियां और कार्यक्रम चलेंगे। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को इसका उद्घाटन किया। उपराज्यपाल ने कहा कि समुदाय के लोगों के विकास, आर्थिक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि को लेकर कई योजनाएं शुरू की गई हैं। सरकार ने समुदाय के लोगों को आरक्षण दिया है। आने वाले समय में उन्हें राजनीतिक, सामाजिक, शिक्षा आदि में आरक्षण और बराबर का हक मिलेगा। इस मौके पर जनजातीय विभाग के आयुक्त सचिव डॉ. शाहिद इकबाल ने विभाग की ओर से चलाई जाने वाली योजनाओं के बारे अवगत कराया।
200 जनजातीय गांवों में खुलेंगे स्मार्ट स्कूल
अगले एक महीने तक प्रदेश में 200 जनजातीय गांवों में 40 करोड़ की लागत से स्मार्ट स्कूल खुलेंगे। आठ जगहों पर ट्रांजिट कैंप बनेगा। इसमें प्रत्येक में 150 लोग रुक सकेंगे। यहां लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच की सुविधा होगी। अतिरिक्त टैंट की व्यवस्था होगी। मवेशियों को रखने के लिए भी व्यवस्था होगी। पुंछ और जम्मू में जनजातीय संग्रहालय और रिसर्च सेंटर 2022 तक तैयार हो जाएगा। 350 गांव जनजाति समुदाय के ऐसे चुने गए हैं, जहां पर 22 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।