बिजली की कमी के कारण पठानकोट-जम्मू रेलखंड के विद्युतीकरण के बाद भी मात्र चार लंबी दूरी की रेलगाड़ियां ही इलेक्ट्रिक इंजन के सहारे चल रही हैं। जबकि यहां रोजाना 18-20 ट्रेनें रोजाना पहुंचती हैं। साप्ताहिक ट्रेनों को मिलाकर यह संख्या 35 तक पहुंच गई है। पंजाब से मिलने वाली बिजली पर्याप्त नहीं है। इस वजह से केवल चार गाड़ियों को ही इलेक्ट्रिक इंजन से चलाया जा रहा है।
इनमें दिल्ली-जम्मू राजधानी एक्सप्रेस, हावड़ा-जम्मू हिमगिरि एक्सप्रेस, दिल्ली-जम्मू दुरंतो और स्वराज एक्सप्रेस शामिल है। रेलवे का कहना है कि रेल खंड पर सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक इंजन से तभी चलाना संभव होगा जब पूरी बिजली सप्लाई मिले। रेलवे प्रशासन को जितनी बिजली चाहिए, उतनी पंजाब से नहीं मिल पाती है।
डेढ़ साल पहले आठ मेगावाट बिजली के लिए जम्मू कश्मीर पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (जेकेपीडीडी) को साढ़े दस करोड़ रेलवे द्वारा दिया जा चुका है। सांबा और मनवाल में रेलवे के ट्रैक्शन सब स्टेशन को जेके पीडीडी के ग्रिड स्टेशन से जोड़कर बिजली की आपूर्ति करने की योजना है। उल्लेखनीय है कि फिलहाल सुजानपुर व दसुआ (पंजाब ) से आठ मेगावाट बिजली की सप्लाई मिल रही है जिससे ट्रेनों को चलाया जा रहा है।