कारीगरों के समग्र विकास के लिए जेटीएफआरपी के तहत शिल्प समूहों को इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि एक छत के नीचे उनके समूह को लाया जा सके। मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेकेईआरए/जेटीएफआरपी डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह ने कहा कि जेटीएफआरपी के तहत पारंपरिक शिल्पों में पैपर माची (जादीबल), विल्लो विकर (गांदरबल), ऊन व पश्मीना (बांदीपोरा) का भी विकास किया गया है।
कलस्टर सदस्य शहीना कहती हैं कि नूरबाग कारीगर कलस्टर में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह अब प्रतिदिन 800-1000 कमाने में सक्षम हैं। एक अन्य कारीगर मैमुना ने कहा कि उनके उत्पादों के लिए अब सुनिश्चित बाजार समर्थन मिलेगा। जेटीएफआरपी ने नूरबाग में कलस्टर के विकास के लिए कंसल्टेंसी की सेवाएं ली हैं। इस कलस्टर में ज्यादा तर महिलाएं शामिल हैं।