विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले कंगन निर्वाचन क्षेत्र में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इस बार इस सीट से कांग्रेस के एजाज अहमद शेख, भाजपा के नजीर रैना, पीडीपी के बशीर अहमद मीर, जम्मू कश्मीर पीपल्स कांफ्रेंस के मुश्ताक अहमद शाह और नेशनल कांफ्रेंस के मियां अल्ताफ चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार जो अब तक का आकलन किया गया है उसमें नेकां के मियां अल्ताफ और पीडीपी के बशीर अहमद मीर के बीच टक्कर दिख रही है।
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले की कंगन विधानसभा सीट पर नेशनल कांफ्रेंस का दबदबा रहा है। लेकिन लोकसभा चुनावों में नेकां को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। नेकां के मियां अल्ताफ इस सीट पर वर्ष 1996 से लगातार जीतते आ रहे हैं। उन्होंने 2008 के विधानसभा चुनावों में पीडीपी के बशीर अहमद मीर को हराया। अल्ताफ को 19,210 वोट मिले थे, जबकि मीर को 11,495 ही वोट मिल पाए थे। इस सीट पर पहले चरण के तहत 25 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। गौरतलब है कि मीर ने 2008 में पहली बार इस सीट से चुनाव लड़ते हुए अच्छा प्रदर्शन किया था।
मियां अल्ताफ कानून में स्नातक हैं। वह नेकां सरकार में 2009 तक वन मंत्री का पद संभाले हुए थे। कंगन सीट पर उनका कब्जा वर्ष 1987, 1996, 2002 और 2008 विधानसभा में बरकरार रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार मियां अल्ताफ की लोकप्रियता लोगों में काफी है, खासकर गुज्जर समुदाय के लोगों के बीच। पीडीपी ने लोकसभा चुनावों में इस सीट पर 3607 वोटों से बढ़त हासिल की थी। युवकों का कहना है कि बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। पिछड़े इलाकों के होने के बावजूद भी यहां के पढ़े लिखे युवाओं को सरकारी नौकरियां नहीं दी जातीं।
उधर, पीडीपी के कार्यकर्ताओं को मीर पर काफी भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि उनके द्वारा घर-घर जाकर किया प्रचार व्यर्थ नहीं जाएगा। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2008 के चुनाव में इस क्षेत्र में 59.46 प्रतिशत वोट पड़े थे।