जम्मू। करीब दो माह की पाबंदियां झेलने के बाद विपक्ष को सरोर टोल प्लाजा का नया मुद्दा मिल गया है। विपक्षी दल टोल प्लाजा पर भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रमुख रूप से कांग्रेस के विभिन्न कैडर रोजाना धरने प्रदर्शन कर रहे हैं। नेकां ने भी इसका खुलकर विरोध किया है। भाजपा के लिए भी टोल प्लाजा का मुद्दा सिरदर्द बन गया है।
पाबंदियों के दौरान विपक्षी दलों की गतिविधियां न के बराबर रहीं। राज्य प्रशासन की ओर से हाल ही में जम्मू संभाग में विपक्षी दलों के नेताओं पर पाबंदियां हटाई गई हैं। पाबंदियां हटने के साथ ही 11 अक्तूबर को सरोर टोल प्लाजा के शुरू होने पर नया मुद्दा गरमाया, जिसे विपक्ष कैश करने में पूरा जोर लगा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा का कहना है कि सरोर टोल प्लाजा का मुद्दा आम लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। नियमों को ताक पर रखकर जम्मू संभाग में टोल प्लाजा खोले जा रहे हैं। भाजपा ने विपक्ष में रहकर कुछ और बोला और अब सत्ता में आकर लोगों को बेवकूफ बनाने का काम किया जा रहा है। कांग्रेस आम लोगों की तकलीफ को लेकर आवाज उठाती रही है। टोल प्लाजा से आम लोगों के साथ राज्य की अर्थ व्यवस्था पर असर पड़ेगा। सरकार पूर्व सरकार के कार्यकाल में शुरू किए गए प्रतिष्ठित विकास प्रोजेक्टों को मुकम्मल कराने में विफल रही है। 70 करोड़ रुपया खर्च करके भी तवी नदी में कृत्रिम झील नहीं बनाई जा सकी है।
नेकां के प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि बन टोल प्लाजा का भी नेकां ने विरोध किया था और अब सरोर प्लाजा का भी विरोध कर रहे हैं। सरकार टोल प्लाजा खोलकर जम्मू के राष्ट्रवादी लोगों पर आर्थिक बोझ थोप रही है। भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। टोल प्लाजा सिर्फ जम्मू संभाग में ही क्यों खोले जा रहे हैं। प्रांतीय सचिव शेख बशीर अहमद ने कहा कि जब पिछली बार सरोर टोल प्लाजा को स्थापित किया जा रहा था तो भाजपा के स्थानीय विधायक ने उसे तुड़वाने में सहयोग दिया था और अब वही विधायक चुप्पी साधे हुए हैं। इससे साफ है कि भाजपा की रजामंदी से ही ऐसे टोल प्लाजा स्थापित किए जा रहे हैं।
पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्ष देव सिंह ने कहा कि सरकार नए टोल प्लाजा खोलकर मंदिरों के शहर को टोल प्लाजा वाला शहर बनाने का काम कर रही है। बन, चिनैनी नाशरी आदि स्थानों पर पहले ही टोल लिया जा रहा है। अब 40 किमी. के दायरे में सरोर टोल प्लाजा खोल दिया गया है। इससे पर्यटकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अर्थ व्यवस्था पर असर पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर की अर्थ व्यवस्था पहले ही खराब हालात के कारण प्रभावित है।