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जम्मू-कश्मीर: प्रदेश की राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्र की पैनी नजर, सर्वदलीय बैठक में तीन केंद्रीय मंत्री भी रहेंगे मौजूद

Tue, 22 Jun 2021 06:10 AM IST
Vikas Kumar बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू

सार

सूत्रों ने बताया कि बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रह सकते हैं। 
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अमित शाह, राजनाथ सिंह और जितेंद्र सिंह - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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केंद्र की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 24 जून को जम्मू-कश्मीर के नेताओं की बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तीन केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहेंगे। बैठक शाम को तीन बजे होगी। बैठक के लिए न्योता मिलने के बाद चल रही राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्र की पूरी नजर है। सभी की निगाहें नेकां, पीडीपी तथा पीएजीडी (गुपकार गठबंधन) के फैसले पर टिकी हुई है। पीएजीडी की मंगलवार को होने वाली अहम बैठक में नेताओं के भाग लेने या न लेने की तस्वीर साफ हो पाएगी। 

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सूत्रों ने बताया कि बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रह सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला बैठक को लेकर पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वे प्रस्तावित बैठक को लेकर जम्मू और कश्मीर में चल रही राजनीतिक घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी हासिल कर रहे हैं। बीते दो दिनों से कश्मीर में सियासी सरगर्मी तेज है। पीडीपी की राजनीतिक मामलों की समिति ने महबूबा मुफ्ती को फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है तो नेकां प्रमुख दो दिनों से पार्टी सांसदों व नेताओं से विचार-विमर्श कर रहे हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस व अपनी पार्टी ने भी बैठक कर रायशुमारी की है। जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी मंगलवार को अपने पत्ते खोल सकते हैं। 

ज्ञात हो कि बैठक के लिए चार पूर्व मुख्यमंत्रियों, चार उप मुख्यमंत्रियों समेत 14 नेताओं को सर्वदलीय बैठक के लिए बुलाया गया है।  

प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुद्दा भी उठेगा
सर्वदलीय बैठक में प्रदेश से जुड़े नेता राजनीतिक गतिरोध दूर करने, आम लोगों के दर्द तथा नौकरशाही से लोगों को आ रही परेशानियों को उठा सकते हैं। इसके साथ ही राज्य का दर्जा बहाल करने तथा परिसीमन की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर विधानसभा चुनाव कराने की मांग भी रख सकते हैं। नेताओं की ओर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद लगभग दो साल तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। इसमें पर्यटन से लेकर कारोबार को हुए नुकसान की बात भी नेता रखेंगे।

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