रियासत में रविवार से तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान शुरू हो रहा है। राज्य के 22 जिलों में 5 साल तक के करीब 19 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले दिन बूथों और अगले दो दिन डोर टू डोर अभियान चलेगा। बर्फबारी होने पर प्रभावित क्षेत्रों में दो दिन अभियान को बढ़ाया जाएगा। ऐसे इलाकों में सुरक्षा बलों सहित अन्य एजेंसियों की सेवाएं ली जाएंगी।
अभियान को सफल बनाने के लिए 11115 बूथों पर 44460 वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसमें आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्थ वर्कर शामिल हैं।
दो-दो सौ ट्रांजिट और मोबाइल टीमें अलग से बस स्टैंड, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन सहित अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले बच्चों को कवर करेंगी।
बक्करवाल, खानाबदोश बच्चों के लिए मोबाइल टीमें काम करेंगी। पांच बूथों पर एक सुपरवाइजर की सेवा ली जाएगी। पूरे अभियान में 2223 सुपरवाइजर शामिल होंगे।
परिवार कल्याण विभाग के निदेशक डा. बलदेव राज शर्मा के अनुसार अभियान को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां की गई हैं। पिछले कई साल से जम्मू-कश्मीर राज्य पोलियो मुक्त चल रहा है।
पल्स पोलियो में डोर टू डोर अभियान में ईंट भट्ठों, झुग्गी-झोपड़ी, विस्थापित गुज्जर बक्करवालों, निर्माण स्थलों और सड़क किनारे बसे श्रमिकों के बच्चों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
रियासत में अप्रैल माह में पोलियो की इंजेक्शन वैक्सीन शुरू की जा रही है। परिवार कल्याण विभाग की ओर से 25 अप्रैल से इसे शुरू करना प्रस्तावित है।
यह वैक्सीन तीसरी डोज के साथ दी जाएगी। इसमें बच्चे को छह हफ्ते, दस हफ्ते और चौदह हफ्ते में तीन डोज दी जाती हैं।
भारत के पोलियो मुक्त होने के बाद अब आखिर चरण में इंजेक्शन वैक्सीन शरीर में असक्रिय रहने वाले पोलियो वायरल को पूरी तरह से खत्म करने का काम करेगी।
विभाग की ओर से इंजेक्शन वैक्सीन को सफल बनाने के लिए पैरामेडिकल कर्मियों के लिए प्रशिक्षण वर्कशाप और शिविर लगाए जा रहे हैं। हालांकि पहली बार इंजेक्शन वैक्सीन चुनौती रहेगी।